फर्रुखाबाद। परिषदीय विद्यालयों में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मिलने वाले टैबलेट और उनके डेटा पर हर साल 75,64,800 रुपये खर्च हो रहे हैं। बावजूद इसके कई स्कूलों में टैबलेट इस्तेमाल नहीं हो रहे और शिक्षक रजिस्टर पर कलम घिसाकर हाजिरी लिख रहे हैं।
वर्ष 2022-23 व 2023-24 में जिले के 1,576 परिषदीय विद्यालयों के लिए शासन ने 3,096 टैबलेट उपलब्ध कराए थे। इन टैबलेट में एयरटेल सिम लगाई गई और कंपोजिट ग्रांट से प्रत्येक विद्यालय से माहवार 200 रुपये के हिसाब से सालाना 4,800 रुपये काटे जा रहे हैं। सभी स्कूलों में इंटरनेट डेटा पर सालाना कुल खर्च 75,64,800 रुपये आता है।
टैबलेट का वास्तविक हाल
लोकल स्तर की रिपोर्ट में बताया गया है कि 1,576 विद्यालयों में से केवल 645 विद्यालयों ने ही ऑनलाइन हाजिरी दर्ज की है। कई स्कूलों में टैबलेट अलमारी में बंद हैं, कुछ खराब हो चुके हैं और कुछ शिक्षक उन्हें घर ले गए हैं। प्राथमिक विद्यालय जमापुर में दिए गए दो टैबलेटों में से एक नेटवर्क समस्या और दूसरा चार्जिंग की वजह से घर ले जाया गया।
प्राइमरी विद्यालय तीसराम की मड़ैया और चित्रकूट में भी टैबलेट घर पर रखे जाने या खराब होने की शिकायतें आईं। जूनियर हाईस्कूल खानपुर में एक टैबलेट खराब हुआ और दूसरा बैग गिरने से गुम हो गया। बाढ़ के समय भी कई स्कूलों ने टैबलेट घर ले जाने की वजह बताई है।
टैबलेट की कंपनी वाले मॉडल की बाजार कीमत करीब आठ हजार रुपये बताई जा रही है। इसी आधार पर 3,096 टैबलेट की अनुमानित कीमत 2,47,68,000 रुपये आंकी गई है। इतने पैसों से भी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है और ऑनलाइन हाजिरी प्रणाली अपेक्षित रूप से लागू नहीं हो पाई है।
आगे की कार्रवाई
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा, “50 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन हाजिरी लगाई जा रही है। तकनीकी समस्या से ऑनलाइन हाजिरी लगाने में दिक्कत आ रही है। उसे भी दूर कराने का प्रयास किया जाएगा।” विभाग ने खराब टैबलेट ठीक कराने और नेटवर्क समस्याओं को दूर कराने का आश्वासन दिया है।
स्थानीय स्कूलों के अभिभावक और शिक्षकों का कहना है कि टैबलेट और डेटा का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी सक्रिय होकर वितरण व देखरेख पर ध्यान दें। आगे के निर्देशों और मरम्मत के बाद ही ऑनलाइन हाजिरी की स्थिति बदलने की उम्मीद है।
स्रोत: अमर उजाला

