गाज़ीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज के 300 बेड वाले अस्पताल में एमआरआई व सीटी की हालत सोमवार को मरीजों के सामने आई। 12 करोड़ की लागत से सीआरएस फंड से लगाई गई एमआरआई में तत्काल स्लॉट नहीं मिल रहे।
यहां एक दिन में मात्र 15 मरीजों की ही एमआरआई हो पा रही है इसलिए जांच के लिए ओपीडी पर 11 जनवरी के बाद की तिथियां दी जा रही हैं। तीन दिन पहले उद्घाटन होने के बावजूद नए सीटी स्कैन मशीन का संचालन शुरू नहीं हो सका है और पुराने सीटी स्कैन कक्ष पर रोज़ करीब 80 से 90 मरीजों का बोझ पड़ रहा है।
ओपीडी, सर्जरी और दवा व्यवस्था
सोमवार को अस्पताल की ओपीडी में शाम तीन बजे तक 4,400 मरीजों ने इलाज कराया। वहीं एमआरआई में 15 मरीजों की जांच हुई और पुराने सीटी स्कैन कक्ष में 90 मरीजों का सीटी हुआ। चार ओटी कक्षों में 26 सितंबर के उद्घाटन के बाद तीन दिन में 75 से अधिक सर्जरी हो चुकी हैं।
अमृत फार्मेसी पर 50 प्रतिशत तक छूट के चलते लंबी कतार लगी थी। संचालित फार्मेसी पर फिलहाल 1,350 प्रकार की दवाइयां उपलब्ध बताई जा रही हैं और भविष्य में कुल 4,000 प्रकार की दवाइयां मिलने की व्यवस्था की जा रही है।
निजी केंद्रों पर जांच का खर्च भी मरीजों के सामने चुनौती बना हुआ है। एमआरआई के लिए बाहर निजी केंद्रों पर 9,000 से 12,000 रुपये तक खर्च आता है जबकि अस्पताल में एमआरआई 2,000 से 3,500 रुपये में हो रही है। सीटी स्कैन के साधारण ब्रेन स्कैन 1,500 से 4,000, कंट्रास्ट स्कैन 5,000 से 8,500 और जटिल एंजियोग्राफी 10,000 से 15,000 रुपये तक लगते हैं।
प्राचार्य प्रो. आनंद मिश्रा ने कहा, “नई सीटी स्कैन का संचालन एक सप्ताह में शुरू हो जाएगा, जिससे पुराने सीटी स्कैन पर पड़ रहा भार कम हो जाएगा। अमृत फार्मेसी पर जल्द ही कुल चार हजार प्रकार की दवाइयां मिलनी शुरू होगी, जिससे मरीजों को सुविधा होगी।”
मरीजों के लिए अभी विकल्प सीमित हैं: या तो लंबा इंतजार या निजी केंद्रों में महंगी जांच। अस्पताल प्रशासन ने आने वाले दिनों में नई मशीन चालू करने और फार्मेसी में दवाइयों की आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा दिया है।
स्रोत: अमर उजाला

