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हापुड़: धौलाना में 27 सितंबर से प्रस्तावित धरने पर बिना अनुमति कार्रवाई, प्रशासन सख्त

तहसील परिसर में यूजीसी, एससी-एसटी एक्ट और ईडब्ल्यूएस के सरलीकरण के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन के लिए सवर्ण युवाओं ने रैली की अपील की।

हापुड़: धौलाना में 27 सितंबर से प्रस्तावित धरने पर बिना अनुमति कार्रवाई, प्रशासन सख्त
फोटो: अमर उजाला

धौलाना। यूजीसी, एससी-एसटी एक्ट और ईडब्ल्यूएस के सरलीकरण के खिलाफ 27 सितंबर से धौलाना तहसील परिसर में प्रस्तावित अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन को लेकर प्रशासन और आयोजकों के बीच तनातनी बढ़ गई है। पुलिस-प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना अनुमति धरना शुरू नहीं किया जा सकता।

प्रशासन का रुख

एसडीएम धौलाना कल्पना सिंह चौहान ने कहा, “प्रशासन की अनुमति के बिना प्रस्तावित धरना शुरू नहीं किया जा सकता।” तहसील प्रशासन ने यह भी कहा, “बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।” प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर यह कदम उठाने की घोषणा की है।

प्रशासन की चेतावनी के बाद क्षेत्र में शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस बल और अधिकारियों को स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। तहसील परिसर और आसपास के इलाकों में आवश्यकतानुसार निगरानी बढ़ाने की बात भी कही जा रही है।

आयोजकों और युवाओं की तैयारी

सवर्ण समाज के युवाओं ने शुक्रवार देर शाम साठा चौरासी क्षेत्र के विभिन्न गांवों में बैठकें कीं और रणनीति बनाई। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से 27 सितंबर को धौलाना पहुंचने की अपील की है। संगठनात्मक सक्रियता बढ़ने से प्रशासन सतर्क हो गया है।

राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के युवा क्षेत्रीय अध्यक्ष युद्धि राणा का कहना है, “अपने अधिकारों की आवाज उठाना अपराध नहीं है। अपनी भावी पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अब सवर्ण समाज ने बीड़ा उठा लिया है।” उनके इस बयान से आंदोलन के साथ खड़े लोगों में उत्साह देखा जा रहा है।

स्थानीय लोग भी आयोजन को लेकर divided नजर आ रहे हैं; कुछ सुरक्षा व ट्रैफिक समस्याओं को लेकर चिंतित हैं जबकि कुछ लोगों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार होना चाहिए। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी सूचना के लिए आधिकारिक चैनलों से पुष्टि करें और अनुरोध है कि संवेदनशील स्थानों पर जाने से बचें।

अगले कुछ दिनों में प्रशासन व आयोजकों के बीच कोई बातचीत होती है या नहीं, यह तय करेगा कि धरना शांतिपूर्ण रूप से होगा या फिर नियमानुसार कार्रवाई होगी। स्थानीय लोग और व्यवसायी दोनों ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

स्रोत: अमर उजाला

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Alok Kumar

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कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।