महराजगंज। जितिया पर्व की तैयारियों के बीच निचलौल शहर के चौक-चौराहों पर शुक्रवार को गांव से आए लोग दही और चूड़ा खरीदते दिखाई दिए। पर्व के लिए जरूरत की चीजें बाजार से खरीदने की प्रवृत्ति इस बार साफ दिखी।
बाजार में दही करीब 50 रुपये पाव और चूड़ा 65 रुपये किलो बिक रहा था। इन वस्तुओं की मांग बढ़ने से दाम भी चर्चा में रहे। कई ग्रामीणों ने बताया कि पहले यह सामान घरों में बनता था, आज बाजार की निर्भरता बढ़ी है।
बदलता खरीदारी का रुझान
समय के साथ गांव और शहर की जीवनशैली में आए बदलाव का असर पर्व-त्योहारों की खरीदारी पर दिखने लगा है। कुछ वर्षों पहले खेतों में पकने वाले धान से घर पर ही चूड़ा बनाया जाता था, जबकि अब खेती और पशुपालन की बदलती व्यवस्था के कारण लोग बाजार से खरीदना पसंद कर रहे हैं।
खोनहौली निवासी लल्लन यादव ने बताया, “कि वह निचलौल बाजार दही खरीदने आए थे। उन्होंने कहा कि पहले शहर के लोग गांव में दही खरीदने आते थे। उस समय अच्छी गुणवत्ता की दही कम कीमत में मिल जाती थी। अब गांव के लोगों को ही पर्व के लिए शहर से दही खरीदनी पड़ रही है।”
जितिया पर्व के सिलसिले में महिलाएं नहाय-खाय के साथ व्रत की शुरुआत करती हैं। कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार को नहाय-खाय हुआ, शनिवार को महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी और रविवार को सूर्योदय के समय पारण कर व्रत समाप्त करेंगी।
स्थानीय विक्रेता कहते हैं कि त्यौहार के दिनों में दही और चूड़े की खरीद हमेशा बढ़ जाती है। इस बार किसानों और ग्रामीण परिवारों की रोजमर्रा की बदलती रोजगार व रहन-सहन की वजह से घरों में बन जाने वाली चीजों की जगह बाजार का सहारा ज्यादा लिया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर खेत व पशुपालन पर फिर ध्यान दिया गया तो परंपरागत घरेलू उत्पादन लौट सकता है। फिलहाल इस बरस जितिया पर बाजार में रौनक और खरीदारी दोनों देखने को मिल रही हैं।
स्रोत: अमर उजाला

