मथुरा। कुसुम सरोवर में हाल में पानी में तैरती मृत मछलियों और उठती दुर्गंध ने स्थानीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेचैन कर दिया है। पवित्र स्थल पर यह दृश्य धार्मिक आस्था पर असर डाल रहा है और लोग परेशान हैं।
सरोवर में लगातार मछलियों के मरने का कारण स्थानीय लोग ऑक्सीजन की कमी या प्रदूषण बता रहे हैं। जिम्मेदारी की बात उठाने पर कहा जा रहा है कि कुसुम सरोवर की देखरेख का पूरा जिम्मा जीएलए यूनिवर्सिटी का है।
स्थानीय निवासियों ने मत्स्य विभाग और जल विशेषज्ञों की टीम से पानी की तत्काल जांच कराकर मछलियों को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद धरातल पर पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस काम नहीं दिख रहा है।
स्थानीय चिंताएं और मांगें
स्थानीय लोग कर रहे हैं कि प्रशासन और विश्वविद्यालय दोनों ही पल्ला झाड़ रहे हैं। पर्यटक जल में तैरती मछलियों और बदबू देख कर लौट रहे हैं, जिससे वहां आने वाले श्रद्धालुओं का मन विचलित हो रहा है।
सरोवर के पास रहने वाले और मौके पर आने वाले लोग जलचर जीवन के संकट से चिंतित हैं। उन्होंने तुरंत पानी की गुणवत्ता की जांच, ऑक्सीजन स्तर मापने और प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कराने की मांग रखी है।
स्थानीय निवासियों में शामिल लोग हैं:
- सीताराम बाबा
- रामदास बाबा
- ईश्वर दास
- राम भरोसी दास
- गोलू शर्मा
- देवानंद दास
- उदय बाबा
- माधव पंडित
- महावीर शर्मा
- गणेश बघेल
अब राह ये दिखती है कि मत्स्य विभाग और जल विशेषज्ञों की टीम पानी की जांच के लिए आकर रिपोर्ट दे। बाद में मछलियों को बचाने व पानी साफ करने के लिए उचित तकनीकी और तात्कालिक उपाय किए जाने चाहिए। स्थानीय लोग प्रशासन से शीघ्र पहल की अपेक्षा कर रहे हैं।
स्रोत: अमर उजाला

