लखनऊ। शॉपिंग मॉल और स्मार्ट सिटी इलाकों में पेड पार्किंग की सुविधाओं पर भरोसा कर के लोग अपनी महंगी गाड़ियाँ वहां छोड़ देते हैं। हालांकि सुरक्षा के दावे होने के बावजूद अगर पार्किंग से वाहन चोरी हो जाए तो सवाल उठता है कि इसकी भरपाई किसकी होगी।
कानूनी जवाबदेही
कानूनी तौर पर पेड पार्किंग से वाहन चोरी होने पर मुख्य जवाबदेही पार्किंग संचालक या ठेकेदार की होती है। अध्ययन और मामले‑कानून में यह रुख नज़र आता है कि पार्किंग की देखरेख और सुरक्षा का दायित्व जो सामान का स्वीकार कर रहा है वह स्वीकारीकृत उत्तरदायी होता है।
लोग अक्सर पार्किंग की मौजूदगी और सीसीटीवी, गेट‑पास आदि सुविधाओं को देखकर बिना सतर्क हुए गाड़ी छोड़ देते हैं। ऐसे में संचालक की ओर से सुरक्षा का आश्वासन होने पर भी चोरी होने पर मालिक अकेला नहीं रहता।
संदेश और चेतावनी सेलीन पर भी संचालक की जिम्मेदारी पूरी तरह खत्म नहीं होती। विशेषज्ञों और फैसलों के हवाले से कहा जाता है कि “‘पार्क एट ओनर्स रिस्क’ का बोर्ड लगाकर नहीं बच सकता संचालक”। यह रुख उन सिद्धांतों पर आधारित है जो सेवा प्रदान करने वाले की दायित्व सीमाओं को परिभाषित करते हैं।
नागरिकों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि वे सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार की पेड पार्किंग पर निर्भर रहते हैं। जब सुरक्षा व्यवस्था असफल रहती है तो ऐसे मामलों में नुकसान की पूर्ति और जवाबदेही पर विमर्श और कानूनी प्रक्रिया उभर कर आती है।
आगे क्या देखना है
पेड पार्किंग से संबंधित मामलों में अब यह स्पष्ट माना जाता है कि संचालक‑ठेकेदार की भूमिका और उनके द्वारा दिए गए सुरक्षा वायदे पर कड़ी निगाह रखी जाएगी। इस प्रकार के विवादों में फैसलों से आगे के मानक और रुख तय होंगे, जो पार्किंग संचालकों और वाहन मालिकों दोनों को प्रभावित करेंगे।
स्रोत: अमर उजाला

