प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में आउटसोर्सिंग के माध्यम से फोरमैन अनुदेशक के पदों पर भर्ती करने के शासनादेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। यह रोक 24 जून के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी शासनादेश वैधानिक सेवा नियमावली को पार नहीं कर सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने अखिलेश कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने सरकार से इस मामले में चार सप्ताह में लिखित जवाब मांगा है। याची को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय भी दिया गया है।
नियमावली और प्रक्रिया
अदालत ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए फिलहाल शासनादेश पर रोक लगा दी, लेकिन नियमों के तहत नियमित भर्ती प्रक्रिया जारी रखने की छूट दे दी है। इससे स्पष्ट होता है कि अगर वैधानिक नियमों के तहत भर्ती कराई जाती है तो उसका मार्ग खुला रहेगा। किन्तु आउटसोर्सिंग के जरिए सीधे भर्ती पर फिलहाल रोक बनी रहेगी।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी थी कि 24 जून का शासनादेश सेवा नियमावली 2021 के विपरीत है। हाईकोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया और आगे की सुनवाई के लिए समय तय किया। अदालत का रुख प्रशासनिक आदेशों और सेवा नियमों के पालन पर केंद्रित रहा।
यह आदेश आईटीआई संचालित संस्थाओं में नियुक्ति पद्धति पर असर होगा। जिन जिलों और केंद्रों ने आउटसोर्सिंग के आधार पर फोरमैन अनुदेशक की नियुक्ति की तैयारी की थी, उन्हें इंतजार करना होगा। दूसरी ओर, नियमों के अनुसार भर्ती कराने वाली व्यवस्थाएं प्रभावित नहीं होंगी।
आगे की प्रक्रिया
सरकार अब चार सप्ताह में अपना जवाब अदालत को सौंपेगी और याची दो सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करेगा। उसके बाद अदालत आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों पर निर्णय लेगी। प्रभावित अभ्यर्थी और आईटीआई प्रशासन आगामी आदेशों के लिए हाईकोर्ट की अगली तारीख का इंतजार करेंगे।
स्रोत: अमर उजाला

