लखनऊ। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्यसभा चुनाव के बीच विपक्षी दलों को एकजुट होने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव का समय ‘मिलन का समय’ होता है और इस दौरान पुरानी गलतियों व कड़वी बातों को भुलाकर सिद्धांत के लिए साथ खड़ा होने का मौका मिलता है।
अखिलेश यादव ने कहा, “अगर किसी को लगता है कि देश के लोकतंत्र, संविधान और अर्थव्यवस्था पर हमला हो रहा है, महंगाई बढ़ रही है या पेट्रोल में E20 और एथनॉल मिलाने जैसे फैसले गलत हैं, तो राज्यसभा चुनाव से पहले साथ आने का यह मौका है, जो साथी साथ आना चाहते हैं, उनके लिए वे पुरानी बातें भूलने को तैयार हैं।”
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया चल रही है और 16 अक्टूबर को मतदान होना है। नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हुई थी और 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं।
वर्तमान विधानसभा संख्या के आधार पर एक उम्मीदवार को निर्वाचित होने के लिए 37 विधायकों के मत की जरूरत होगी। विपक्ष में चल रहे समन्वय और मत वितरण के मद्देनजर अखिलेश का ‘मिलन का समय’ वाला बयान संभावित समझौते या समेकन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी तेज विरोध जारी है। इंडिया ब्लॉक की 30 सितंबर की बैठक में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियान की रणनीति पर चर्चा हुई थी और विपक्षी दलों ने 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में अभियान और 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च का कार्यक्रम घोषित किया है।
अखिलेश ने अपनी पार्टी की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा, “हम सब चीजें भूल जाएंगे” और गंगा में स्नान कर पाप धुल जाने के उदाहरण से बताया कि जो साथी साथ आना चाहते हैं, उनके लिए वे पुरानी बातें भूलने को तैयार हैं। यह बयान अगले कुछ दिनों में विपक्षी दलों की रणनीति और सीट साझा करने की चर्चाओं पर असर डाल सकता है।
पाठकों को सूचित किया जाता है कि 6 अक्टूबर तक नामांकन की अंतिम तिथि है और 16 अक्टूबर को मतदान तय है; विपक्षी बैठकों और घोषणाओं पर आगे की खबरें समय-समय पर उपलब्ध कराई जाएंगी।
स्रोत: प्रभात खबर

