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उत्तर प्रदेश: दो साल से ज्यादा देरी पर जन्म‑मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए अब कोर्ट का आदेश जरूरी

यदि सूचना एक साल से लेकर दो साल के भीतर दी जाए तो डीएम/एसडीएम या उनकी ओर से अधिकृत मजिस्ट्रेट का आदेश देना होगा।

उत्तर प्रदेश: दो साल से ज्यादा देरी पर जन्म‑मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए अब कोर्ट का आदेश जरूरी
फोटो: प्रभात खबर

लखनऊ। जन्म‑मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के नियमों में अहम बदलाव बृहस्पतिवार से लागू कर दिए गए हैं। अब जन्म या मृत्यु की सूचना यदि दो साल से अधिक देर से दी जाती है तो पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा।

केंद्र सरकार के जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में हालिया संशोधन के बाद यह व्यवस्था लागू की गई है। यदि सूचना एक साल के बाद लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है तो जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), सब‑डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या डीएम द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट का सत्यापन और आदेश आवश्यक होगा।

नया नियम क्या कहता है

केंद्रीय पोर्टल पर दो साल से अधिक की देरी वाले मामलों में आदेश से जुड़ी नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसका मतलब यह है कि पुराने मामलों में अब लोकल प्रशासन के स्तर पर ही नहीं, बल्कि अदालत से अनुमति लेना जरूरी होगा। इससे पहले ऐसे मामलों में एसडीएम स्तर पर ही आदेश जारी किए जा सकते थे।

नगर निगम के जन्म‑मृत्यु अनुभाग के प्रभारी अनिल शुक्ला ने कहा, “दो साल से पुराने आवेदनों की अब फीडिंग नहीं हो पा रही है. आवेदन फीड करते समय ही प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से जारी आदेश की संख्या मांगी जा रही है.”

नया नियम विशेष रूप से उन लोगों को प्रभावित करेगा जो समय पर सूचना दर्ज नहीं करा पाए थे या दस्तावेज तैयार नहीं कर पाए थे। अब ऐसे आवेदक प्रमाण पत्र दिखाने के लिए अदालत में याचिका लगाकर आदेश प्राप्त करेंगे, तब ही पंजीकरण सम्भव होगा।

नागरिकों के लिए क्या करना होगा

लोगों को सलाह दी जा रही है कि जन्म या मृत्यु की सूचना जल्द दर्ज कराएं ताकि अतिरिक्त कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सके। जिन मामलों में देरी पहले ही दो साल से अधिक हो चुकी है, उन्हें प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट से आदेश ले कर आवेदन करना होगा।

स्थानीय नगर निगम और संबंधित कार्यालय केंद्रीय पोर्टल पर आवश्यक दस्तावेज व आदेश की संख्या माँगेंगे। आवेदक कोर्ट के आदेश के बिना ऑनलाइन या ऑफलाइन फीडिंग पूरी नहीं कर पाएंगे।

स्रोत: प्रभात खबर

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Vikas Kumar

Vikas Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।