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औरैया: तीन दिन की बारिश के बाद खेत और मकानों को बड़े नुकसान, 126 मिमी बरसात

सेंगर और अहनैया नदियों के उफान से सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूबीं; दस से अधिक कच्चे मकान ढह गए और परिवार बेघर हुए।

औरैया: तीन दिन की बारिश के बाद खेत और मकानों को बड़े नुकसान, 126 मिमी बरसात
फोटो: अमर उजाला

औरैया। तीन दिन से चल रही चक्रवाती बारिश रविवार को थम गई। सुबह हल्की फुहार और तेज हवा आई, लेकिन 11 बजे के बाद मौसम साफ हो गया और लोग घरों से बाहर निकलकर नुकसान का मुआयना करने लगे।

मौसम साफ होने पर जगह‑जगह जलभराव दिखा और खेतों की कई फसलें तबाह मिलीं। दो दिन में हुई बारिश का आंकड़ा 126 मिलीमीटर तक पहुंच गया था। उफनाई सेंगर और अहनैया नदी के किनारे के खेत पानी में डूबे रहे और नदी के पास बने स्थानों को खतरा बना हुआ है।

मकानों और फसलों का नुकसान

ग्रामीण व कस्बाई इलाकों में 10 से अधिक पुराने कच्चे मकानों में दरारें आ गईं और कई मकान भरभराकर गिर गए। बेला थाना क्षेत्र के हरदू, सूनीखेड़ा, नौसारा, गैली, बेला और मल्होसी गांवों में करीब आधा दर्जन मकान ढह गए। मुरादगंज के चंदनापुर दयालसिंह गांव में अरविंद, सतेंद्र, कल्लू, नरोत्तम और पुष्पेंद्र के घर भी गिर गए।

कई परिवार सुरक्षित बाहर आ गए, लेकिन मलबे में अनाज, कपड़े और गृहस्थी का सारा सामान दबकर नष्ट हो गया। भटौली गांव में रामशरन राठौर के मकान की पिछली दीवार गिरने से गेहूं की बोरियां और आटा मलबे में दब गए। अचानक बेघर हुए परिवारों को रहने व खाने‑पीने में दिक्कते आ रही हैं।

अछल्दा क्षेत्र में लगातार बारिश से सेंगर और अहनैया नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। महेवा मार्ग के पास चिमकुनी गांव के निकट सेंगर नदी उफान पर है और किनारे के खेतों में खड़ी धान व बाजरा की फसलें जलमग्न हो रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।

लेखपालों ने प्रभावित गांवों का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया है। लेखपाल विकास बाबू ने बताया कि वर्जनतहसील प्रशासन को सर्वे रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। ब्लॉक व तहसील प्रशासन के सहयोग से पात्र परिवारों को राहत सामग्री, मुआवजा और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलवाया जाएगा। -कमल सिंह, एसडीएम बिधूना

किसानों को सलाह

किसानों ने पंपसेट से फसल का पानी निकाला और कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर दवाओं का छिड़काव किया ताकि नुकसान कम किया जा सके। जिले के कृषि अधिकारी ने कहा, “पकी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ऐसे में खेत में जलनिकासी दुरुस्त कर लें। जरूरत के अनुसार नमी को दूर करने के लिए दवाओं का छिड़काव भी कर सकते हैं। धान की जलनिकासी जरूर करें, नहीं तो उपज का रंग काला पड़ जाएगा।” -दुर्गेश सिंह, जिला कृषि अधिकारी

स्रोत: अमर उजाला

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Alok Kumar

Alok Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।