बांदा। मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में अतर्रा, तिंदवारी व नगर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों ने मरीजों का उपचार किया, लेकिन जरूरी सुविधाओं की कमी बरकरार रही। कई जगह खांसी की सिरप और लैब टेक्नीशियन न होने से Patienten परेशान दिखे।
अतर्रा के नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में छह माह बाद डॉक्टर मिले। रविवार को आंबेडकर नगर स्थित केंद्र पर डॉ. अल्का मिश्रा ने मरीजों का उपचार किया, लेकिन लैब टेक्नीशियन के खाली पद के कारण रक्त संबंधी जांच नहीं हो सकी। डॉ. अल्का मिश्रा ने कहा, “मरीजों की जांच कर उपचार किया गया।”
दवाइयों और जांच की कमी
कई केंद्रों पर खांसी की सिरप उपलब्ध नहीं थी। एक मरीज को खांसी का सिरप न मिलने से बिना दवा के लौटना पड़ा। गांव बसरेही से आए ईशान अली ने कहा, “बुखार की दवा मिल गई, लेकिन खांसी की सिरप नहीं मिला।” यही हाल बांदा नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छाबी तालाब में भी देखा गया।
छाबी तालाब केंद्र में दोपहर तक 35 मरीजों ने अपना इलाज कराया। यहां अधिकतर बुखार, सर्दी-जुकाम और खांसी के मरीज थे, जिन्हें खांसी की दवा न मिलने से वापसी करनी पड़ी। अतर्रा केंद्र में भी मरीजों को रक्त जांच कराने के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ा क्योंकि लैब टेक्नीशियन की पोस्ट खाली थी।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तिंदवारी में आयोजित आरोग्य मेले में 50 मरीजों ने पंजीकरण कर उपचार कराया। डॉ. सुमित वर्मा और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने दवाइयां वितरित कीं। ब्लॉक जसपुरा क्षेत्र के गड़रिया, सिंधनकलां और चंदवारा नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी मेले का आयोजन हुआ।
तीनों जसपुरा क्षेत्र के केंद्रों पर कुल 95 मरीजों ने उपचार कराया। दोपहर तक विभिन्न केंद्रों में बुखार, शुगर और खांसी से पीड़ित कुल 31 मरीजों का भी इलाज किया गया। स्थानीय लोग कहते हैं कि नियमित लैब स्टाफ और आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए, वरना ग्रामीणों को बार-बार शहर तक जाना पड़ता रहेगा।
आगे क्या होगा: स्वास्थ्य विभाग को जल्द रिक्त पद भरने और खांसी की सिरप समेत आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति पर ध्यान देना होगा। अगले आरोग्य मेले या नियमित क्लीनिक में ये कमी दूर करने के निर्देश अपेक्षित हैं।
स्रोत: अमर उजाला

