बिजनौर। 28 सितंबर को कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और बाद में विकास भवन में धरना दिया। प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष हैनरीता राजीव सिंह ने किया।
कांग्रेसियों ने जिला कार्यालय से नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट में प्रवेश किया, जबकि कलक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन पर पहले ही पाबंदी लागू की गई थी। पुलिस ने उन कार्यकर्ताओं को कलक्ट्रेट से बाहर निकाल दिया।
पुतला जलाने का प्रयास और रोकथाम
कलक्ट्रेट से बाहर निकलते ही एक गाड़ी में रखे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पुतलों को बाहर निकालकर जलाने का प्रयास किया गया। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर पुतले छीन लिए और आग लगाने से रोका। इसके बाद प्रदर्शनकारी विकास भवन पहुंचे और वहां धरना प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने एक ज्ञापन भी दिया। उस ज्ञापन में कहा गया है कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा लिए गए एकतरफा निर्णयों पर कुल 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज की है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के जरिए अनाधिकृत रूप से नए मतदाताओं को जोड़ा, अधिकृत मतदाताओं के नाम हटाए और निर्वाचन आयोग की आईटी प्रणाली को दिल्ली में केंद्रित कर दिया। इसके अलावा बताया गया कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों को इस संबंध में जानकारी से दूर रखा गया।
कांग्रेस ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहले से ही वोट चोरी अभियान के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। पार्टी ने मांग की कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाया जाए, उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए और उनके कार्यकाल में लिए गए सभी निर्णयों व मतदाता सूची में किए गए बदलावों की व्यापक एवं स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।
प्रदर्शन में महेश कुमार, निजामुद्दीन, योगेंद्र कुमार, हुमायूं बेग, वसीम अकरम और मोहम्मद हनीफ समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे। पुलिस की रोक के बावजूद कांग्रेस द्वारा दिया गया ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंप दिया गया है और पार्टी ने आगे की कार्रवाई के लिए जवाब की प्रतीक्षा करने का संकेत दिया है।
स्रोत: अमर उजाला

