बाराबंकी। 17 अप्रैल 2004 के सड़क हादसे के 22 साल बाद अदालत ने ट्रक चालक राम प्रकाश को दोषमुक्त कर दिया। यह फैसला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सक्षम द्विवेदी की अदालत में सुनवाई के बाद आया।
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने लंबे समय तक साक्षी पेश नहीं किए। सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि लगभग 21 वर्षों तक अभियोजन ने गवाह प्रस्तुत नहीं किए, जिसे अदालत ने गंभीर लापरवाही बताया। मामले की शुरुआत जैदपुर थाने में दर्ज रिपोर्ट से हुई थी।
हादसे का मामला और आरोप
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार उस दिन ट्रक की चपेट में आने से कार चालक विनय सिंह की मौत हो गई थी। हादसे में कुल पांच लोग घायल हुए थे, जिनमें दो महिलाएँ शामिल थीं। मुकदमे में आरोपी ट्रक चालक राम प्रकाश गोरखपुर जिले के हरपुर उधर थाना क्षेत्र के जखई गांव के निवासी बताए गए थे।
अदालत ने अभियोजन की पैरवी के बहाने और गवाहों की अनुपस्थिति को केस कमजोर करने वाला कारण बताया। सुनवाई के बाद जब अभियोजन पक्ष मामले में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, तो अदालत ने मामले का निपटारा कर दिया।
स्थानीय लोगों ने कहा कि इतने सालों में मामला लंबित रहने से पीड़ित पक्ष और आरोपी दोनों के परिवारों पर असर पड़ा है। कानूनी प्रक्रिया के ऐसे लंबित रहने से न्याय मिलने में देरी होती है और मामलों की सच्चाई सामने आने में भी बाधा आती है।
अगला कदम अब पेंडिंग किसी नई आपत्ति या अपील पर निर्भर करेगा। यदि अभियोजन या पीड़ित पक्ष उच्च न्यायालय में अपील दायर करते हैं तो मामला आगे बढ़ सकता है। फिलहाल जिला अदालत ने राम प्रकाश को दोषमुक्त करार दिया है और उसे रिहा कर दिया गया है।
स्रोत: अमर उजाला

