बाराबंकी। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे चार दशक से चरखे से जुड़े हुए हैं और हर साल गांधी जयंती पर बाराबंकी के गांधी भवन में चरखा चलाकर सूत कातते हैं। तेजतर्रार छवि और 80 से अधिक एनकाउंटर करने वाली टीम का हिस्सा रहे पांडे ने कहा है कि निजी जीवन में वे महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानते हैं।
राजेश ने एसटीएफ और एटीएस में सेवाएं दीं और वर्ष 2021 में सेवानिवृत्त हुए। लोक सेवक के रूप में जहां भी तैनात रहे, गांधी जयंती के दिन वे वहीं गांधी भवन में जाकर सूत काटा करते थे। उनके साथ कई बार बाराबंकी के समारोहों में पब्लिक और स्थानीय बुद्धिजीवी भी शामिल होते हैं।
चरखे और गांधीवादी विचार
पांडे के लिए खादी केवल कपड़ा नहीं बल्कि विचार है। वे गांधीजी के विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और स्वदेशी अपनाने के संदेश को चरखा चलाकर जीवित रखते हैं। उनका मानना है कि सूत कातना एकाग्रता बढ़ाता है और दिमाग को शांत रखता है, साथ ही यह स्थानीय अर्थव्यवस्था व आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देता है।
उनके पिता स्व. चंद्रप्रकाश पांडेय के मित्र सुरेश राम भाई सर्वोदय मूवमेंट के संस्थापक और गांधीवादी दार्शनिक थे। प्रयागराज के शहराबाद में स्थित सर्वोदय कुटीर में सुरेश राम भाई की लाइब्रेरी में पांडे ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान समय बिताया था। करीब 40 साल पहले यहीं उनके मार्गदर्शन में उन्होंने चरखा चलाना सीखा था।
गांधीवादी विचारों से प्रभावित होकर पांडे बाराबंकी दौरे के दौरान देवा शरीफ में आयोजित गांधी जयंती समारोह में भी हिस्सा लेते हैं और वहां चरखा चलाकर शांति, अहिंसा व सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देते हैं। वे कहते हैं कि अपराध और कानून‑व्यवस्था संभालते समय सख्ती जरूरी है, पर सामाजिक जीवन में शांति और भाईचारा अहम है।
पुलिस विभाग से आईजी (इलेक्शन सेल) के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पांडे धार्मिक और प्रशासनिक सेवा की ओर बढ़े हैं। वे यूपीडा में सेवाएं दे रहे हैं। अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ पद की दौड़ में उनका नाम सामने आया था और वे लखनऊ में श्री महावीर जी ट्रस्ट (पुराने हनुमान मंदिर अलीगंज) में सेक्रेटरी भी हैं।
स्थानीय लोग और गणमान्य इस परंपरा को सकारात्मक मानते हैं। गांधी जयंती पर पांडे का चरखा चलाना कई लोगों को खादी व स्वदेशी के महत्व की याद दिलाता है। अगले 2 अक्तूबर को भी वे बाराबंकी के गांधी भवन में सूत काटेंगे और गांधीवादी संदेश देते रहेंगे।
स्रोत: अमर उजाला

