रामनगर। लोकतंत्र की बहाली के लिए आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानी केदारनाथ अवस्थी का शनिवार को 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रविवार को उनके पैतृक गांव मधवा जलालपुर में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार के समय जेष्ठ पुत्र राजमन अवस्थी ने उन्हें मुखाग्नि दी। नायब तहसीलदार सैयद हैदर तहजीब की मौजूदगी में यूपी पुलिस के जवानों ने शस्त्र झुकाकर उन्हें अंतिम सलामी दी। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर देख परिजन और ग्रामीण आंखें नम कर बैठे।
जनसभा और भावभीनी विदाई
अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे। जनसैलाब ने पुष्पवर्षा करके अपने जननायक को भावभीनी विदाई दी। मौके पर मौजूद लोगों ने उनके संघर्ष और सिद्धांतों को याद किया।
केदारनाथ अवस्थी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव के ही जूनियर हाईस्कूल बनर्की से प्राप्त की थी। 1975 में जब देश पर आपातकाल लगा, तब उन्होंने मुखर होकर इसका विरोध किया था।
आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा के आंदोलन के चलते उन्हें नौ दिसंबर 1975 को फतेहपुर जेल में बंद कर दिया गया था। यातनाएं सहने के बाद भी वे अपने सिद्धांतों पर अटल रहे और क्षेत्र के लोग उन्हें लोकतंत्र के सजग प्रहरी के रूप में याद रखेंगे।
स्थानीय असर और आगे की प्रक्रिया
अंत्येष्टि के बाद परिवार और करीबी नेता-समर्थक मिलकर आगे की श्रद्धांजलि तय करेंगे। शासन की ओर से मिले राजकीय सम्मान ने स्थानीय लोगों में उनके योगदान को पहचान दिलाई है।
ग्राम और आसपास के लोगों में शोक का माहौल बना हुआ है। कई लोग उनकी मौत से दुःखी हैं और उनके आंदोलन के किस्से साझा कर रहे हैं।
स्रोत: अमर उजाला

