भदोही। रैमलपुर में शनिवार को आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का समापन पंडित प्रमोद शास्त्री के प्रवचन के साथ हुआ। उन्होंने भगवान के स्वरूप और भक्तिपथ पर अपने विचार सुनाए।
कथा के अंतिम दिन पंडित प्रमोद शास्त्री ने कहा, “भगवान अपने प्रभाव से नहीं वरन अपने स्वभाव से पूज्य होते हैं।” वे बोले कि श्रीकृष्ण का प्रभाव जग के सामने है, पर उनकी भक्ति का आधार उनका स्वभाव होता है।
श्रीकृष्ण‑सुदामा का उदाहरण
प्रमोद शास्त्री ने सुदामा और श्रीकृष्ण की कथा का उदाहरण देते हुए बताया कि जब सुदामा ने दो मुट्ठी चूड़े चढ़ाई, तब श्रीकृष्ण ने उसे दो लोक की संपत्ति प्रदान की। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रसंग बताते हैं कि भगवान अपने भक्तों का ख्याल रखते हैं और उनकी प्रकृति में करुणा होती है।
कथा में नव योगेश्वरों की कथा भी शामिल रही, जिसमें भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की व्याख्या की गई। अंत में परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाई गई, जिससे श्रोता धर्म और मोक्ष के महत्व को समझ सके।
कार्यक्रम में स्थानीय संगठनों और भक्तों की भारी उपस्थिति रही। इस दौरान संतोष पाठक, विनोद, प्रमोद, नरेंद्र, शैलेन्द्र, विरेन्द्र पाठक, रमाशंकर दूबे, सोमेश्वर दूबे, नारायण दास, लोकनाथ मिश्र आदि मौजूद रहे। आयोजकों ने बताया कि श्रद्धालुओं ने कथावाचन को ध्यान से सुना और प्रसाद ग्रहण किया।
स्थानीय लोगों ने कहा कि ऐसी कथाएँ समाज में नैतिक और आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ाती हैं। कई युवाओं ने भी कथा में रुचि दिखाई और प्रश्न पूछे।
आगे की योजना
आयोजकों ने बताया कि भविष्य में और भी धार्मिक कार्यक्रम कराए जाएंगे ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान को बढ़ावा मिल सके। श्रद्धालुओं से कहा गया कि वे आगामी आयोजनों की जानकारी के लिए आयोजक समितियों से संपर्क रखें।
स्रोत: अमर उजाला

