भदोही। जिले के कारीगरों की बनायीं कालीनें संसद भवन में बिछाई जा चुकी हैं और स्थानीय कारीगरी को राष्ट्रीय पहचान मिली है। ओबीटी कंपनी के गोपीगंज कारखाने से तैयार किए गए हस्तनिर्मित कालीन नए संसद भवन के सेंट्रल विस्टा में बिछाए गए।
मुख्य तथ्य और संख्या
संसद में कुल 5,282 वर्ग गज क्षेत्र में भदोही की कालीन बिछाई गई। राज्यसभा के लिए 151 और लोकसभा के लिए 131 पीस कारपेट भेजे गए थे। जिले से करीब 20 से 25 कारीगर संसद भवन में कालीन बिछाने के काम पर गए थे। ओबीटी के अध्यक्ष आईबी सिंह ने बताया कि इनमें महंगे ऊन और सिल्क का प्रयोग भी हुआ।
लिम्का बुक में दर्ज कारीगरी
मोढ़ के कज़िया गाँव निवासी स्व. रामजीत बिंद की बारीक कारीगरी लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। उनकी बनाई तीन सिल्क कालीनों को वर्ष 2008 में लिम्का बुक में शामिल किया गया था। उनके बनाए कालीनों में गिनती के आंकड़े खास हैं:
- एक कालीन में एक वर्ग इंच में 4,000 टांके
- ताजमहल का चित्र वाली कालीन में एक इंच में 4,200 टांके
- पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के चित्र वाली कालीन में एक वर्ग इंच में 6,000 गांठ
रामजीत बिंद का निधन वर्ष 2018 में हुआ। उनके बेटे ने बताया कि बेटे ने ही एपीजे अब्दुल कलाम की तस्वीर वाली कालीन बनाकर उन्हें भेंट की थी।
एकमा के अध्यक्ष उमेश कुमार गुप्ता बताते हैं कि भदोही की कालीनें दुनिया के बड़े होटलों और उद्योगपतियों के बीच भी लोकप्रिय हैं। वे कहते हैं कि विशेष कालीन तैयार कराने पर खरीदार और निर्यातक के बीच समझौता होता है, इसलिए कई बार खरीदारों के नाम गोपनीय रखे जाते हैं।
स्थानीय प्रभाव और आगे क्या होगा
OBT के अधिकारियों का कहना है कि संसद में इस्तेमाल कालीनों के लिए स्थानीय कारीगरों की साख और मांग बढ़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिले की कालीन और कारीगरों की प्रशंसा भी की थी, जिससे निर्यात और विशेष ऑर्डरों में वृद्धि की उम्मीद है। आगे कारखानों और कारीगरों को और ऑर्डर मिलने पर काम बढ़ेगा और रोजगार के मौके बनेंगे।
स्रोत: अमर उजाला

