महोबा। तीन दिन लगातार हुई बारिश ने जिले के किसानों की उम्मीदें भंग कर दीं। खन्ना और कुलपहाड़ क्षेत्र के कई गांवों में खेतों में पानी भरा होने से खरीफ फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं।
जिला प्रशासन के अनुसार जनपद में दो लाख हेक्टेयर से अधिक में बोई गई उड़द, मूंग, तिल और मूंगफली की फसलें प्रभावित हुई हैं। अधिकांश खेतों में पानी जम जाने से मूंगफली की फसल सड़ने लगी है और लागत निकालना किसानों के लिए मुश्किल हो गया है।
किसानों की हालत और मांगें
खन्ना क्षेत्र में चंद्रावल नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के खेतों में पानी भर गया है और तिलहन, मूंग व उड़द की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। किसान रघुवीर यादव, बसंता, सुरेंद्र यादव, भगीरथ और सुनील कुमार ने बताया कि खरीफ की फसल बर्बाद होने से परिवार का खर्च और अगली फसल की तैयारी मुश्किल हो गई है। किसानों ने फसलों का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।
कुलपहाड़ के बड़े काश्तकार राजेश यादव ने बताया कि उन्होंने महंगे बीज मंगाकर मूंगफली, तिल और मूंग बोई थी, लेकिन बारिश के चलते पूरी फसल नष्ट हो गई। पवन यादव ने कहा कि कम बारिश की संभावना को देखते हुए उन्होंने तिल अधिक रकबे में बोई थी, मगर खेत में एक भी पौधा बचा नहीं है।
एडीएम राजस्व इंद्रनंदन सिंह ने कहा, “बारिश से बर्बाद फसलों का संयुक्त टीम से सर्वे कराया जा रहा है। जल्द ही रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाएगी।”
किसानों की आपदा के मद्देनजर सोमवार को डीएम प्रभास कुमार पलका गांव स्थित खेतों में जाकर फसलों की स्थित देखी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व व कृषि विभाग की संयुक्त टीम मौके पर जाकर फसलों का सर्वे करें और क्षति का नियमानुसार आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाए। सर्वे कार्य में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और किसानों को शासन की ओर से निर्धारित प्रावधानों के तहत आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
स्रोत: अमर उजाला

