बिजनौर। करीब 10 माह पहले शहर के मेडिसिन पॉइंट मेडिकल स्टोर पर नारकोटिक्स टीम ने छापा मारा था और तब भारी मात्रा में दवाइयां जब्त की गई थीं। अब वही टीम मामले की तह तक पहुंचने के लिए बिलों और रिकॉर्ड की प्रामाणिकता छान रही है।
बरेली सेंट्रल ब्यूरो की नारकोटिक्स टीम ने उस छापे में ट्रामाडोल, अल्प्राजोल और पेंटाजोसिन सहित छह लाख 14 हजार टैबलेट और इंजेक्शन जब्त किए थे। कुल कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई थी और मेडिसिन पॉइंट संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी गई थी।
बिलों की सच्चाई जांचना
अब टीम ने दवाइयों की बिक्री के दौरान जारी किए गए बिलों की असलियत पर विशेष ध्यान दिया है। जिन मेडिकल स्टोरों को मेडिसिन पॉइंट ने नारकोटिक्स के दायरे में आने वाली दवाइयां बेचीं, उनके बिलों की प्रामाणिकता परखी जा रही है।
जांच में टीम मेडिकल स्टोर संचालकों से खरीद और बिक्री के बिलों का रिकार्ड मांग रही है। टीम यह देख रही है कि क्या बिल फर्जी तरीके से बनाकर लगाए गए हैं या वास्तविक खरीद-बिक्री के दस्तावेज हैं। पिछले कुछ दिनों में टीम ने जिले के कई मेडिकल स्टोरों पर पहुंचकर रिकॉर्ड चेक किया है।
छापे के समय जब्त की गई कुछ प्रमुख चीजें इस प्रकार थीं:
- ट्रामाडोल, अल्प्राजोल व पेंटाजोसिन की कुल छह लाख 14 हजार टैबलेट
- इंजेक्शन समेत लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की दवाइयां
मामले से जुड़े अधिकारी फिलहाल दलीलों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेंगे। जांच टीम मेडिकल स्टोरों पर पहुंचकर बिलों के अलावा सप्लाई चेन के अन्य दस्तावेज भी देख रही है ताकि यह पता चल सके कि दवाइयां कैसे और किस स्रोत से आईं।
औषधि निरीक्षक ने अपनी तरफ से स्पष्ट किया, “नारकोटिक्स टीम ने उन्हें जांच के लिए साथ नहीं लिया है। मेडिसिन पॉइंट पर हुई कार्रवाई के बाद टीम बिलों की प्रामाणिकता के लिए मेडिकल स्टोरों पर रिकॉर्ड जांचने पहुंच रही है।”
जांच से स्थानीय फार्मासिस्ट और स्टोर संचालकों में चिंतित माहौल है। अधिकारी कहते हैं कि जो भी मेडिकल स्टोर बिलों में अनियमितता पाए गए उन्हें नोटिस भेजा जाएगा और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्रोत: अमर उजाला

