चित्रकूट। पहाड़ी इलाकों व मध्य प्रदेश में लगातार तीन दिनों से हुई भारी बारिश के बाद मंदाकिनी फिर उफान पर आ गई है और जिले के कई हिस्से पानी में डूब गए हैं। नदी ने इस बार ऐसा तेज बहाव दिखाया कि एक सीजन में 10 बार खतरे के निशान पार कर लिया गया।
जलस्तर 14 अगस्त से बढ़ना शुरू हुआ था और 19 अगस्त को यह खतरे के निशान 126.750 मीटर पर पहुंचा। 20 अगस्त को जलस्तर 129.400 मीटर तक गया। इसके बाद 27 अगस्त को 127.200 मीटर पर पहुंचा, जबकि 29 अगस्त की सुबह फिर से बढ़कर अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड 135.200 मीटर तक पहुंच गया। हाल ही में 25 सितंबर की रात आठ बजे जलस्तर फिर खतरे के निशान के ऊपर 127.200 मीटर दर्ज हुआ।
मुख्य तारीखें और स्तर
- 14 अगस्त: जलस्तर बढ़ना शुरू
- 19 अगस्त: 126.750 मीटर (खतरे का निशान पार)
- 20 अगस्त: 129.400 मीटर
- 27 अगस्त: 127.200 मीटर
- 29 अगस्त: 135.200 मीटर (सबसे बड़ा रिकॉर्ड)
- 25 सितंबर: रात 8 बजे 127.200 मीटर
मंदाकिनी के इस उफान से रामघाट, सती अनुसुइया, स्फटिक शिला, जानकीकुंड, पुरानी लंका, कामदगिरि मार्ग, आरोग्यधाम और तरौंहा सहित नदी किनारे बसे दर्जनों गांव करीब-करीब जलमग्न हो गए। बाढ़ की तेज धार में 50 साल पुराना लंका तिराहा से हनुमान धारा जाने वाला पुल भी बह गया।
बाढ़ के समय हजारों लोग फंसे थे। स्थानीय प्रशासन की मदद के साथ एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और वायु सेना ने रेस्क्यू अभियान चलाकर कई लोगों को सुरक्षित निकाला। बचाव कार्य में दूरी और तेज बहाव चुनौती बने रहे।
बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा, “पहली बार एक सीजन में 10 बार मंदाकिनी खतरे के निशान के पार पहुंची है।” उनकी बात से जिलेवासी की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि बार-बार पानी आने से जमीनी नुकसान और आवागमन प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से नदी के किनारे न जाने और चेतावनी सिग्नल का पालन करने को कहा है। आगे भी बारिश की भविष्यवाणी पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकतानुसार और राहत टीमें भेजी जाएंगी।
स्रोत: अमर उजाला

