फतेहपुर। परिषदीय विद्यालयों में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा रही है और विद्यार्थियों को कचरा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने इस अभियान की तैयारियां 30 सितंबर तक पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
अभियान के तहत विद्यालयों में अलग-अलग प्रकार के कचरे के लिए चार रंग के कूड़ेदान रखे जाएंगे। दो से 31 अक्तूबर तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के प्रति जागरूक किया जाएगा।
कूड़ेदानों का वर्गीकरण
विद्यालयों में हरा, नीला, लाल और काला कूड़ेदान लगाए जाएंगे और हर डिब्बे का उपयोग स्पष्ट रूप से तय किया गया है। विभाग ने कचरे के सही पृथक्करण पर जोर दिया है ताकि निस्तारण सुरक्षित तरीके से हो सके।
- हरा डिब्बा: गीला कचरा, फल‑सब्जी के छिलके और बचा हुआ भोजन
- नीला डिब्बा: प्लास्टिक, कागज, कांच और धातु जैसे सूखा कचरा
- लाल डिब्बा: इस्तेमाल किए गए बैंडेज व अन्य स्वच्छता संबंधी कचरा
- काला डिब्बा: दवाइयां, एक्सपायरी पदार्थ, बल्ब, टूटे थर्मामीटर और जोखिम वाले कचरे
विद्यालयों से निकलने वाले खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य ई‑कचरे के लिए अलग संग्रह केंद्र विकसित किए जाने हैं। अधिकारियों को इन कूड़ेदानों की खरीद और नियमित इस्तेमाल सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
अभियान के दौरान दो अक्तूबर को स्वच्छ भारत दिवस पर विशेष कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। बीएसए प्रिंसी मौर्या ने बताया कि अभियान की गतिविधियों की फोटो और जानकारी “क्लब्स फॉर मिशन लाइफ” पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि बच्चों में बचपन से ही कचरा अलग करने, सुरक्षित निस्तारण और प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने की आदत डाली जाए। स्कूलों और अभिभावकों से सहयोग की भी अपेक्षा जताई गई है।
स्रोत: अमर उजाला

