मिर्ज़ापुर। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताब‑कापी और कलम होनी चाहिए, उसी उम्र के किशोरों के नाम जिले की पुलिस रेकॉर्ड में अपराध के मामलों में दर्ज हो रहे हैं। जनवरी से जून 2026 तक कुल 97 मामलों में बाल अपचारियों की संलिप्तता सामने आई है।
इन 97 मामलों में 75 मामले मारपीट के हैं, जो कुल का करीब 77 फीसदी बनते हैं। बाकी मामलों में नौ मामले व्यवसाय/व्यपहरण (व्यपहरण के रूप में दिया गया), चार मामले चोरी, दो दुष्कर्म, दो छेड़खानी, एक झपटमारी, एक हत्या के प्रयास, एक पशु वध और दो लापरवाही से वाहन चलाने से हुए सड़क हादसे शामिल हैं। इनमें दर्ज किशोरों की उम्र 14 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है।
आंकड़ों की प्रवृत्ति
एनसीआरबी के आंकड़ों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि किशोर अपराध में मारपीट के मामले अन्य अपराधों की तुलना में काफी अधिक हैं। जिले में छः महीने के आंकड़ों में करीब तीन‑चौथाई मामलों का स्वरूप मारपीट का है, जो 77 प्रतिशत के करीब बैठता है। यह रुझान स्थानीय पुलिस और समाज के लिए चिंता का विषय बन गया है।
भौगोलिक रूप से सबसे अधिक मामले कोतवाली देहात और चील्ह में दर्ज हुए, जहां 11‑11 मामले आए। अदलहाट में नौ मामले दर्ज हुए। बाकी थानों में मात्रा कम रही पर कुल संख्या को देखते हुए समग्र रूप से किशोर अपराधों में बढ़ोतरी दिखती है।
स्थानीय अधिकारी बच्चों और किशोरों के परिजनों व स्कूलों से समन्वय बढ़ाने की बात कर रहे हैं। पुलिस के साथ सामुदायिक निगरानी, स्कूली गतिविधियों में वृद्धि और परामर्श सेवाओं को सक्रिय करने की जरूरत बताई जा रही है।
माथे पर यह प्रश्न बना है कि किशोरों को हिंसा और गंभीर अपराधों से रोकने के लिए कौन‑सी नीतियाँ प्रभावी होंगी। अगले चरण में पुलिस और जिला प्रशासन से मिलकर रोकथाम के कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाने की उम्मीद है।
स्रोत: अमर उजाला

