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मैनपुरी: ईशन नदी में 8 नाले गंदा पानी सीधे गिर रहे, एसटीपी प्रोजेक्ट अटका

नदी का 5.159 किमी हिस्सा शहर के बीच से गुजरता है; पंपिंग स्टेशन के लिए 400-500 वर्ग मीटर जमीन न मिलने से एसटीपी काम रुका हुआ है।

मैनपुरी: ईशन नदी में 8 नाले गंदा पानी सीधे गिर रहे, एसटीपी प्रोजेक्ट अटका
फोटो: अमर उजाला

मैनपुरी। जिले की जीवनदायिनी ईशन नदी अब नाले जैसी बन चुकी है और शहर के कई हिस्सों का सीवेज सीधे इसमें गिर रहा है। इस समस्या के बावजूद लंबे समय से नदी की सफाई और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम धराशायी पड़ा है।

नदी के 112 किमी के दायरे में मैनपुरी का हिस्सा विशेष रूप से परेशान कर रहा है, जिसमें से 5.159 किमी हिस्सा शहर के बीच से गुजरता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मामले की जानकारी में 6 नहीं बल्कि 8 बड़े नाले बिना किसी शोधन के सीधे नदी में गंदा पानी छोड़े जा रहे हैं। नगर पालिका का कहना है कि नालों के मुहाने पर जाल लगाए गए हैं, लेकिन बारिश के कारण वे हट गए और अभी उन्हें दोबारा लगाने का दावा किया जा रहा है।

प्रोजेक्ट अटका, जमीन का विवाद

नमामि गंगे योजना के तहत सिंचाई विभाग ने ईशन नदी की सफाई व किनारे दुरुस्त करने के लिए 5 से 6 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है, पर यह छह माह से रुका पड़ा है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना भी अधर में है क्योंकि पंपिंग स्टेशन के लिए आवश्यक 400-500 वर्ग मीटर जमीन नहीं मिल पा रही।

सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार ने बताया कि नमामि गंगे के तहत सफाई, किनारे दुरुस्त करने और जलकुंभी हटाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है। उन्होंने कहा कि एसटीपी के लिए जमीन चिह्नित है और पंपिंग स्टेशन की जमीन मिलते ही काम आगे बढ़ेगा।

जल निगम ग्रामीण इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर आरपी सिंह ने कहा कि नालों को डायवर्ट करने के लिए पंपिंग स्टेशन बनाना जरूरी है और जमीन मिलने के बाद ही एस्टीमेट बनेंगे और पाइप तथा मोटर की क्षमता तय होगी। फिलहाल जमीन की आड़ में पूरा प्रोजेक्ट थम गया है।

स्थानीय साहित्यकार श्रीकृष्ण मिश्र ने बताया कि कभी यह नदी खेतों की सिंचाई करती थी और आसपास घने जंगल थे, लेकिन समय के साथ नदी पर अतिक्रमण बढ़ गया और अब मुहाने तक मॉल, स्कूल व बहुमंजिला दुकानें खड़ी हैं। एनजीटी के निर्देशों के बावजूद 50 मीटर के दायरे में निर्माण हुए हैं और हाल ही में प्रशासन ने सदर तहसील के 60 तथा भोगांव के 20 अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजे हैं।

नदी के प्रदूषण से आसपास के गांवों व शहर के लोग परेशान हैं। जब तक पंपिंग स्टेशन के लिए जमीन नहीं मिलती और एसटीपी नहीं बनता, नदी का जल और अधिक दूषित होता रहेगा। प्रशासन ने बार-बार नोटिस और जाल लगाने का आश्वासन दिया है, अब जमीन के आवंटन और त्वरित कार्रवाई की प्रतीक्षा है।

स्रोत: अमर उजाला

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Alok Kumar

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कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।