रामपुर। जिले में शुक्रवार की रात से शनिवार की शाम तक लगातार हुई तेज बारिश ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी। हवा के साथ आई तेज बरसात और खेतों में भरे पानी से हजारों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई।
किसानों का कहना है कि इस बार जिले में कुल 1.26 लाख हेक्टेयर में धान की फसल लगी थी। शाहबाद, स्वार, बिलासपुर, सदर, मिलक और टांडा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई स्थानों पर पानी खेतों से निकल नहीं पा रहा और पकी हुई फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है।
किसानों की मांगें और नुकसान का आंकलन
किसानों ने प्रशासन और बीमा कंपनियों से तत्काल गांव-गांव जाकर नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराने की मांग की है। बीमा कराने वाले किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कंपनियों से तुरंत सर्वे कराने और नियमानुसार भुगतान दिलाने का आग्रह किया। कुछ किसान संगठन तो किसानों के सभी कर्ज माफ करने की भी मांग कर रहे हैं।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर बारिश इसी तरह जारी रही तो फसल नष्ट होने का स्तर और बढ़ सकता है। 24 घंटे से अधिक जारी बारिश से कई खेतों में धान गिर चुका है और इससे उत्पादन पर बड़ा असर होगा।
“टिकैतबारिश के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल गिरने से उत्पादन प्रभावित होगा। जिन किसानों ने फसल का बीमा कराया है, उन्हें बीमा कंपनी से सर्वे कराकर नियमानुसार भुगतान दिलाया जाए। किसानों को मुआवजे के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। सरकार को गांव स्तर पर नुकसान का आकलन कराना चाहिए। साथ किसानों के सभी तरह के कर्ज माफ किए जाएं।” – हसीब अहमद, प्रदेश महासचिव, भाकियू टिकैत
“पकी धान की फसल बर्बाद होने से किसानों की पूरी साल की मेहनत प्रभावित हो गई है। बारिश से खराब हुई फसल का सर्वे जल्द कराया जाए। जिन किसानों की उपज बच गई है, उसे सरकारी खरीद केंद्रों पर उचित मूल्य पर खरीदा जाए। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान की कुछ भरपाई हो सकेगी।” – राजपाल चौधरी, जिलाध्यक्ष,भाकियू टिकैत
“एक फसल खराब होने का असर किसान के परिवार की पूरी आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। बारिश से नुकसान झेल रहे किसानों को बैंक कर्ज की किस्त जमा करने में राहत दी जाए। वसूली पर रोक लगाने के साथ किसानों को ब्याज में छूट मिले। सरकार तत्काल राहत पैकेज घोषित कर किसानों को आर्थिक संकट से बचाए।” – फरीद खान, जिला संगठन मंत्री, भाकियू अराजनैतिक
“जिले में बारिश से धान समेत अन्य फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। खेतों में पानी भरने और फसल गिरने से हुए नुकसान का मौके पर आकलन कराया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद नियमानुसार किसानों को मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी। किसानों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने को भी कहा गया है।” – कुलदीप सिंह राणा, जिला कृषि अधिकारी रामपुर
स्रोत: अमर उजाला

