आगरा। एसएन के हृदय रोग विभाग की कैथ लैब में बीते 18 महीने में हृदय संबंधी सर्जरी के मामलों में तेज़ी दर्ज की गई है। हॉस्पिटल के आंकड़ों के मुताबिक कुल 2402 मरीजों ने कैथ लैब में हृदय संबंधी प्रक्रियाएँ करवाईं।
इनमें 1429 मरीजों की एंजियोग्राफी, 785 मरीजों की एंजियोप्लास्टी और 188 मरीजों को पेसमेकर लगाया गया। कुल मरीजों में 21 फीसदी की उम्र 35 साल से कम पाई गई। 36 से 50 साल के मरीज 30 फीसदी, 51 से 70 साल 32 फीसदी और 70 साल से ऊपर दूसरे मरीज रहे। सबसे कम उम्र का मरीज 28 साल का था।
कम उम्र में बढ़ रहे मामलों के कारण
विभागाध्यक्ष हृदय रोग डॉ. बसंत गुप्ता ने बताया कि युवाओं में बढ़ा हुआ वजन, कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह और कार्यजीवन का तनाव मुख्य कारण दिखाई दिए। कई युवा मरीजों ने देर रात तक जागने, फास्टफूड, धूम्रपान और शराब के सेवन की आदतें बताईं। अक्सर सीने में दर्द या अनियमित धड़कन दिखने पर उन्होंने जांच न कराकर खतरा बढ़ा लिया।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ नागर ने कहा, “धड़कन बढ़ना-कम होना, बेचैनी और सीने में दर्द हो रहा है तो इसे नजरअंदाज न करें। डॉक्टर को दिखाकर ईसीजी जरूर कराएं। इससे काफी हद तक बीमारी पकड़ में आ जाती है। 30 की उम्र के बाद ईसीजी और 40 की उम्र के बाद ईको करानी चाहिए।”
विशेषज्ञों ने स्वस्थ लोगों के मानक दिल की धड़कन और रक्तचाप की सीमाएँ भी बताईं। सामान्य हृदय की धड़कन 60-100 बार प्रति मिनट मानी गई; पुरुषों के लिए 70-75, महिलाओं के लिए 80-85। सामान्य रक्तचाप 120/80 एमएमएचजी और हाईबीपी 140/90 एमएमएचजी से अधिक माना गया।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर सीने में भारीपन या तेज दर्द हो, दर्द बाएं हाथ, जबड़े या गर्दन तक जाए, थोड़ी दूरी चलने पर सांस फूलना या अचानक बेहोशी महसूस हो तो तुरंत जांच करवाई जाए। वे रोजाना 5-10 हजार कदम चलने, तले हुए और फास्ट फूड से परहेज़, धूम्रपान व शराब से बचने और रात को 6-8 घंटे स्वस्थ नींद लेने की सलाह दे रहे हैं।
अस्पताल के आंकड़े और डॉक्टरों की चेतावनियाँ स्थानीय लोगों के लिए संकेत हैं कि समय पर लक्षण पहचान कर जांच कराने से जीवन सुरक्षित रह सकता है। मरीजों को अपने नज़दीकी अस्पताल में ईसीजी कराने की सलाह दी जा रही है।
स्रोत: अमर उजाला

