अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कल्चरल एजूकेशन सेंटर ने तीन दिवसीय राष्ट्रीय युवा सम्मेलन-2026 आयोजित किया। सम्मेलन का विषय ‘गुमनाम नायकों का स्मरण’ रखा गया था और यह हाल ही में सम्पन्न हुआ।
सम्मेलन का केंद्रीय विषय ‘भारतीय इतिहास का उपनिवेश-मुक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं को प्रेरित करना’ था। इसकी प्रेरणा ओडिशा के 12 वर्षीय नाविक शहीद बाजी राउत से ली गई। आयोजकों ने कहा कि बाजी राउत का साहस स्वतंत्रता संग्राम में आम नागरिकों के योगदान का प्रतीक है।
कार्यक्रम और सहभागिता
यह कार्यक्रम भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद और ओडिशा अनुसंधान केंद्र के सहयोग से हुआ। शुरुआत वाद‑विवाद और साहित्यिक क्लब द्वारा आयोजित निबंध लेखन प्रतियोगिता से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय आंदोलन के कम चर्चित अध्यायों और गुमनाम नायकों के बलिदान पर अपने विचार रखे।
सम्मेलन में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का प्रारंभिक चरण भी आयोजित किया गया। शाम के सत्रों में नाट्य क्लब ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए, जिनमें ऐतिहासिक विषयों को परिसर के सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचाया गया। अकादमिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को आपस में जोड़ा गया ताकि इतिहास को नागरिक मूल्यों का स्रोत समझा जा सके।
परिचर्चा का संचालन हिंदी विभाग के प्रोफेसर शंभुनाथ तिवारी ने किया। परिचर्चा में औपनिवेशिक दृष्टिकोण के प्रभाव, समावेशी समझ की आवश्यकता और अभिलेखागार, मौखिक इतिहास तथा क्षेत्रीय परंपराओं के महत्व पर चर्चा हुई। राजनीति विज्ञान, इतिहास और अंग्रेजी विभागों के प्रोफेसरों ने भी इसमें भाग लिया।
सम्मेलन का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को पारंपरिक कथाओं से आगे बढ़ाना और विद्यार्थियों को अनेक आवाज़ों व प्रतिरोध के रूपों से परिचित कराना बताया गया। साहित्यिक, कलात्मक और नाट्य माध्यमों के जरिए युवा इतिहास को आलोचनात्मक दृष्टि से देखने और सीखने के लिये प्रेरित हुए।
आयोजकों ने कहा कि आगे भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर इतिहास के विस्मृत पहलुओं को उजागर किया जाएगा और युवा पीढ़ी में नागरिक चेतना को बढ़ावा दिया जाएगा।
स्रोत: अमर उजाला

