बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (जेएनसीयू) के समाजशास्त्र विभाग में शनिवार को भारतीय ज्ञान परंपरा पर अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्री प्रो. आरएन त्रिपाठी मुख्य वक्ता रहे।
प्रो. आरएन त्रिपाठी पहले लोक सेवा आयोग और उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने अपनी बात में बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा आदिकाल से समाज के चरित्र निर्माण में सहायक रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य ज्ञान की विभिन्न शाखाओं में इस परंपरा का महत्व पुनर्स्थापित करना है।
व्याख्यान के मुख्य बिंदु
प्रो. त्रिपाठी ने परंपरा के ऐतिहासिक और सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परंपरा केवल पुरातन विचार नहीं बल्कि वर्तमान समाज के नैतिक और सांस्कृतिक ढांचे को आकार देती है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारंपरिक ज्ञान के स्थान और उसकी पुनर्व्यवस्था पर चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्य स्मिता ने किया। समाज विज्ञान संकाय के अध्यक्ष प्रो. एसपी. सिंह और समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ. प्रियंका सिंह भी व्याख्यान के दौरान मंच पर मौजूद रहीं। प्रो. राम नरेश यादव, डॉ. अनिल कुमार सहित अन्य प्राध्यापक और विद्यार्थी भी उपस्थित थे।
मंचीय प्रतिभागियों ने व्याख्यान की सराहना की और कहा कि ऐसी चर्चाएँ विश्वविद्यालय में ज्ञान-विकास और बहस को प्रोत्साहित करती हैं। विद्यार्थियों ने भी प्रो. त्रिपाठी से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासा दूर की। कई छात्रों ने परंपरा और आधुनिकता के मेल पर और अधिक मार्गदर्शन की मांग की।
आगे क्या होगा
समाजशास्त्र विभाग आगामी सत्रों में इसी तरह के और विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित करने की योजना बना रहा है ताकि विद्यार्थियों को विविध दार्शनिक और शैक्षिक दृष्टिकोण मिलें। जिन छात्रों ने प्रश्न पूछे उन्हें विभागीय समय सारिणी के अनुसार फॉलो-अप सत्रों की जानकारी दी जाएगी।
स्रोत: अमर उजाला

