गाज़ियाबाद। नगर निगम क्षेत्र के कई आवासीय इलाकों में चल रही अवैध पशु डेरियाँ स्थानीय लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई हैं। शासन‑प्रशासन द्वारा इन डेरियों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति नहीं बदली है।
मौजूदा हालात के अनुसार शहर में लगभग 550 अवैध डेरियाँ बेधड़क चल रही हैं और उनमें 10 हजार से अधिक मवेशी रखे गए हैं। दो साल पहले यह संख्या करीब 400 थी, जो अब 600 तक पहुंच गई है। इसी अवधि में नगर निगम महज 50 डेरियाँ बंद करा पाया है।
नालियों और सीवरेज पर असर
इन डेरियों में गोबर निस्तारण का कोई समुचित प्रबंध नहीं है। डेयरी संचालक सबमर्सिबल पंप के पानी के दबाव से गोबर सीधे नालियों और सीवर लाइनों में बहा रहे हैं। नतीजा यह हुआ है कि नालियों में पानी का बहाव रुक गया है और सीवरेज लाइनें पूरी तरह चोक हो चुकी हैं।
बंद नालियों और सीवर की वजह से कई इलाकों में लगातार जलभराव और बदबू की शिकायतें आ रही हैं। लोग रोजमर्रा की जिंदगी में परेशान हैं और संक्रमण के खतरे को लेकर भी चिंता जाहिर कर रहे हैं।
नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष कुमार ने कहा, “शिकायत मिलने पर मौके की जांच कर नियम विरुद्ध पाई जाने वाली डेरियों पर कार्रवाई की जाती है।” उन्होंने यह भी कहा, “जिन परिवारों ने अपनी निजी जरूरत के हिसाब से दो पशु पाल रखे हैं, उन्हें निगम की ओर से छूट दी गई है।”
डॉ. आशीष ने नियमों पर भी जोर दिया और बताया, “हालांकि, उनके लिए भी सख्त नियम है कि वे गोबर और गंदगी को नाले या सीवर में नहीं बहाएंगे। यदि सीधे लोग भी गंदगी बहाते पाए गए तो उन पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
स्थानीय निवासी उम्मीद कर रहे हैं कि नगर निगम केवल नोटिस तक सीमित रहने की नीति छोड़कर ठोस कार्रवाई शुरू करे। आगामी दिनों में अगर पटरी पर न लाया गया तो और इलाकों में भी स्थितियां बिगड़ सकती हैं और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ बढ़ेंगी।
स्रोत: अमर उजाला

