गोंडा। पिछले 48 घंटों से हो रही लगातार बारिश ने शहर और आस-पास के गांवों में परेशानी बढ़ा दी है। जिले में अब तक करीब 80 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है और तेज हवा ने हालात और जटिल कर दिए हैं।
बारिश और हवा के कारण खेतों में खड़ी धान, मक्का और गन्ने की फसलें कई जगहों पर गिर गईं। शुक्रवार को खरगूपुर, पसका, करनैलगंज, वजीरगंज और परसपुर इलाकों में सैकड़ों हेक्टेयर फसलें मलबे की तरह बिखर गईं, जबकि कुछ खेतों में पानी भर गया है। किसानों को पैदावार घटने और फसल सड़ने की चिंता सता रही है।
किसानों की हालत और नुकसान
भंगहा के रामनरेश, शारदा प्रसाद और रामऔतार, रमगड़िया के रामचरित्र, हुसैन नगर के सोनू, ईश्वरदीन पुरवा के अमित और बनघुसरा के पंकज ने बताया कि धान की फसल पकने को तैयार थी और अब यह गिरने से खराब होने लगी है। पसका क्षेत्र के सरैया निवासी भरत कुमार ने कहा कि तेज हवा से गन्ना गिर गया। लोहंगपुर के संतोष पांडेय और करनैलगंज के सुखदेव, राजितराम, भगवती प्रसाद, रामराज, पवन व बृजेश भी फसल गिरने से उत्पादन प्रभावित होने और सड़न के खतरे की बात कर रहे हैं।
वजीरगंज के बाबू तिवारी, गुड्डू, बबलू, चंद्रभूषण, काली, बजरंगी और आलोक ने जलभराव से खेतों और घरों को नुकसान होने की बात बताई। परसपुर के खुशीराम, बलराम, जीवन, राजेंद्र, घल्लर और अनिल भी फसल बर्बाद होने को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन ने अभी तक व्यापक नुकसान का आकलन जारी नहीं किया है।
शहर में जलभराव और प्रशासन की कार्रवाई
शहर के चौक, ईदगाह रोड, मेडिकल कॉलेज परिसर, कोतवाली नगर और कचहरी इलाके में शुक्रवार को पानी भर गया। इससे राहगीरों और अस्पताल आने-जाने वालों को परेशानी हुई। मेडिकल कॉलेज पहुंचे मरीज त्रिभुवन ने कहा कि जलभराव के कारण मरीजों और तीमारदारों को आने-जाने में दिक्कत हुई।
नगर पालिका के ईओ संतराम ने बताया कि जलभराव वाले स्थलों पर टीमों को भेजकर समस्या का निराकरण कराया जा रहा है। वहीं आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि मौसम विभाग ने 26 सितंबर को जिले में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है और प्रशासनिक अधिकारी सतर्क हैं। प्रभावित इलाकों में पैनी निगाह रखी जा रही है और आगे की स्थितियों के अनुसार राहत कार्य चलाया जाएगा।
स्रोत: अमर उजाला
