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हमीरपुर: सितंबर में 450mm से ज्यादा बारिश, 95,590 हेक्टेयर तिल प्रभावित

मूसलाधार बरसात से 1,92,448 हे खरीफ क्षेत्र प्रभावित; 30 हजार किसानों ने बीमा दावे किए, कई गांवों का संपर्क कटा हुआ है।

हमीरपुर: सितंबर में 450mm से ज्यादा बारिश, 95,590 हेक्टेयर तिल प्रभावित
फोटो: अमर उजाला

हमीरपुर। सितंबर तक लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने जिले के किसानों के लिए बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। मौसम विभाग के शुरुआती रुझान में सूखे की आशंका के चलते कई किसानों ने तिल की फसल बोई थी, लेकिन इस साल की वर्षा ने पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 1,92,448 हेक्टेयर में खरीफ की फसलें बोई गईं। इनमें 95,590 हेक्टेयर तिल, 32,814 हेक्टेयर मूंगफली, 8,010 हेक्टेयर उड़द और 11,487 हेक्टेयर मूंग शामिल हैं। लगातार बारिश और जलभराव से तिल, मूंग, मूंगफली और उड़द को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।

बारिश के आंकड़े और बीते सालों से तुलना

वर्ष 2024 में सितंबर में कुल 307.66 मिमी बारिश दर्ज हुई थी, जबकि 2025 में मात्र 141.53 मिमी रिकॉर्ड हुआ था। इस वित्तीय वर्ष के सितंबर तक यहां करीब 450 मिमी से अधिक वर्षा हुई है। इस तेज बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है और कटे-फटे खेतों के कारण आर्थिक नुकसान बढ़ गया है।

किसानों के अनुभव साफ हैं। “70 बीघा में तिल की फसल बोई थी लेकिन लगातार बारिश व अतिवृष्टि के चलते पूरी फसल चौपट हो गई है।” – कल्लू दीक्षित, पौथिया। “12 बीघे में तिल की फसल बोई थी। लगातार बारिश के चलते पूरी फसल चौपट हो गई है। फसल का बीमा भी नहीं कराया था। करीब डेढ़ लाख से अधिक का नुकसान हुआ है। राजस्व विभाग की कोई टीम सर्वे को नहीं आई है।” – अनंता सिंह, पत्योरा-सुमेरपुर।

जिले में अब तक करीब 30,000 किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया है और वे लोग अपने दावे संबंधित बीमा कंपनी को करें। “अब तक कुल 30 हजार लोगों ने दावे किए हैं। इसके अलावा राजस्व व कृषि विभाग की टीमें सर्वे कार्य में जुटी हैं।” – डॉ. हरिशंकर, जिला कृषि अधिकारी।

स्थानीय समस्याएं और राहत कार्य

गहरौली में 48 घंटे की बारिश से करीब डेढ़ दर्जन कच्चे मकान जमींदोज हो गए हैं और कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। लेखपाल ने बताया कि सर्वे किया जा रहा है और क्षतिग्रस्त मकानों की सूची उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।

भरुआ सुमेरपुर के पास इंगोहटा अंडरपास और निर्माणाधीन गेटों में पानी भर जाने से छह गांवों का संपर्क कट गया है। ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन से अंडरपास में पंप सेट लगाकर तात्कालिक निकासी और क्षेत्र में स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था करने की मांग की है।

अधिकारियों ने राजस्व व कृषि विभाग की टीमों को सर्वे पूरा कर राहत व मुआवजे की सिफारिशें भेजने का निर्देश दिया है। प्रभावित किसान बीमा कंपनियों में अपने दावे जल्द दर्ज कराएं और स्थानीय प्रशासन से संपर्क रखें।

स्रोत: अमर उजाला

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Alok Kumar

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कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।