चंदपा। विकास खंड मुरसान के गांव चंदपा में बने राजकीय पशु अस्पताल की हालत तीस साल से बदहाल है। परिसर लंबे समय से जर्जर है और आधे से अधिक भाग गिर चुका है, जबकि बचा हुआ एकमात्र कमरा भी बैठने के लिए सुरक्षित नहीं बचा है।
अस्पताल में तैनात पशु चिकित्सक डॉ. नरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि ड्यूटी के दौरान कई बार छत से प्लास्टर और मलबा टूटकर नीचे गिर चुका है और वे खुद भी चोटिल हो चुके हैं। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है और सांप व अन्य जहरीले जीव-जंतु अंदर आ जाते हैं।
अस्पताल की स्थिति
यहां आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं लगाया जा सका है। बाउंड्रीवॉल न होने के कारण आसपास के लोग परिसर में कचरा फेंक देते हैं और आवारा सांड-मवेशी भी अंदर आ जाते हैं। डॉ. चौहान ने अपने निजी खर्च से परिसर में पौधे लगवाए थे, जिन्हें आवारा जानवर नष्ट कर चुके हैं।
सफाई का काम भी वे अपने पैसे से कराते हैं। बड़े घास-झाड़ और झाड़ियों में छिपे जहरीले कीड़ों के डर से आसपास के गांवों के लोग अब पशुओं को लेकर इलाज के लिए अस्पताल नहीं आते। मजबूरी में डॉक्टर को घर बुलाकर इलाज कराना पड़ता है।
अस्पताल के जर्जर हिस्से और सुरक्षा की कमी से लोगों को हर वक्त हादसे का भय रहता है। “हर वक्त हादसा होने का डर बना रहता है।, डॉ. नरेंद्र सिंह चौहान, पशु चिकित्साधिकारी”
आगे क्या होगा
स्थानीय लोगों और पशु चिकित्सक की ओर से कई बार शासन-प्रशासन को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो यह केंद्र पूरी तरह निष्क्रिय हो जाएगा और पशुपालकों को दूर-दराज के अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ेगा।
अब स्थानीय प्रशासन और जिलाधिकारी स्तर से मरम्मत या नए भवन निर्माण की मांग तेज होने की संभावना है। जिलाधिकारी से जवाब मिलने पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
स्रोत: अमर उजाला

