हाथरस। सासनी-जलेसर मार्ग पर बनाए गए नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) की गुणवत्ता पर सवाल उठ गए हैं। करीब छह करोड़ रुपये खर्च कर बनवाए गए इस ओवरब्रिज के पास की सड़क दो माह के अंदर ही उखड़ गई और पास के सर्विस रोड की हालत भी खराब है।
स्थानीय लोग कहते हैं कि एक महीने से ओवरब्रिज के नीचे वाला रास्ता बंद रखा जा रहा है। ट्रेनों के गुजरने के दौरान फाटक 20 से 30 मिनट तक बंद रहता है और खुलने के बाद भी यातायात सामान्य होने में 20 से 30 मिनट लग रहे हैं। भारी वाहनों के गुजरने से उड़ती धूल विजिबिलिटी शून्य कर देती है और दोपहिया वाहन चालक फिसलकर पटरी की ओर गिर रहे हैं।
स्थानीयों की शिकायतें
नगला मया के चंदपाल सिंह ने कहा, “जब ओवरब्रिज चालू हुआ था तो लगा कि वर्षों पुरानी फाटक की समस्या खत्म हो गई, लेकिन दो माह में ही भ्रष्टाचार की पोल खुल गई। शिकायत के बाद रेलवे ने गड्ढे ठीक करने के बजाय सीधे रास्ता बंद कर दिया। अब ट्रेन आने पर धूल फांकते हुए लाइन में खड़ा रहना पड़ता है।”
मान महौ के मनोज कुमार ने बताया, “कच्चे रास्ते पर सांस लेना दूभर, पलट रहे दोपहिया वाहन। पुल के नीचे जो सर्विस रोड बनाया गया है वह पूरी तरह कच्चा और बदहाल है। भारी ट्रक और डंपर गुजरते हैं तो धूल का ऐसा गुबार उठता है कि आगे कुछ नजर नहीं आता। दोपहिया वाहन चालक लगातार फिसलकर गिर रहे हैं। रेलवे अधिकारियों की गैरजिम्मेदारी के कारण एक माह बाद भी मरम्मत का काम पूरा नहीं हुआ है।”
गाँव बघराया के सुधीर कुमार ने कहा, “ओवरब्रिज का पिलर बनने के बाद नीचे फाटक के पास रास्ता पहले की तुलना में बहुत संकरा हो चुका है। कार या बड़ी गाड़ियों के घंटों फंसे रहने का डर रहता है। कई बार जरूरी काम होने पर हमने 5-6 किलोमीटर घूमकर गांव के संपर्क मार्गों का सहारा लिया, लेकिन वहां भी जोखिम कम नहीं है।”
स्थानीय लोग बताते हैं कि जाम और धूल से बचने के लिए वे नजदीकी गावों के उबड़-खाबड़ कच्चे रास्तों से आना-जाना कर रहे हैं। कई बार वहां वाहन फंस जाते हैं और समय अधिक लग जाता है। फिलहाल रेलवे की ओर से मरम्मत का काम सुस्त दिख रहा है और यात्री व ग्रामीण असहज हैं।
अब स्थानीय लोग चाहते हैं कि रेलवे जल्द मरम्मत कराए और सर्विस रोड को पक्का किया जाए ताकि फाटक खुले रहने पर भी धूल और जाम की समस्या न हो।
स्रोत: अमर उजाला

