लखनऊ। बच्चे के जन्म के बाद मिलना वाला जन्म प्रमाणपत्र एक अहम दस्तावेज है और इसे संभालकर रखना चाहिए। कई परिवार इसे बनवाकर फाइल में रख देते हैं और लंबा समय तक जरूरत नहीं पड़ने पर भुला देते हैं।
जन्म प्रमाणपत्र बच्चे की जन्मतिथि और जन्म से जुड़ी जानकारी का आधिकारिक रिकॉर्ड होता है। स्कूल में दाखिले के समय स्कूल कभी-कभी बच्चे की सही जन्मतिथि साबित करने के लिए यह दस्तावेज मांगता है। इसी तरह स्कूल से जुड़े अन्य रिकॉर्ड बनवाते वक्त भी इसकी आवश्यकता पड़ सकती है।
कहाँ-कहाँ काम आएगा
यदि परिवार को भविष्य में पासपोर्ट बनवाना हो तो जन्म प्रमाणपत्र कई जरूरी दस्तावेजों में शामिल होता है और यह काम आ सकता है। बच्चे के बड़े होने पर अलग-अलग सरकारी मामलों में भी जन्मतिथि या जन्म से जुड़ा रिकॉर्ड मांगा जा सकता है। ऐसे समय पर जन्म प्रमाणपत्र एक निर्णायक दस्तावेज बन जाता है।
इसलिए जन्म प्रमाणपत्र बनवाते ही उसकी मूल प्रति सुरक्षित फाइल में रखनी चाहिए। साथ में उसकी फोटो कॉपी और एक डिजिटल कॉपी भी संभालकर रखें। मोबाइल या कंप्यूटर पर सेव रखने से अचानक जरूरत पड़ने पर दस्तावेज तुरंत मिल जाता है।
डिजिटल और हार्ड कॉपी दोनों रखने से चोरी या कागजात खो जाने की स्थिति में काम आसान रहता है। जब भी दस्तावेज किसी कार्यालय में जमा कराए जाएं तो मूल और कॉपी की अलग व्यवस्था बनाकर रखें ताकि किसी भी तरह की दिक्कत से बचा जा सके।
यदि परिवार विदेश यात्रा की योजना बना रहा हो तो बच्चे के दस्तावेज पहले से तैयार रखने पर पासपोर्ट जैसी प्रक्रियाएं जल्दी पूरी हो जाती हैं। जन्म प्रमाणपत्र की जानकारी सही और स्पष्ट होनी चाहिए क्योंकि किसी भी त्रुटि पर दिक्कत हो सकती है।
अंत में, जन्म प्रमाणपत्र को नियमित रूप से चेक करते रहें और इसे अपडेट करने की जरूरत हो तो समय पर करवा लें। इस तरह दस्तावेज की उपलब्धता और वैधता दोनों बनी रहती हैं और अनपेक्षित बाधाएँ कम होती हैं।
स्रोत: अमर उजाला

