तिर्वा। बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ और जिले की बिजली व्यवस्था भी चरमरा गई। अंडरग्राउंड केबल में फॉल्ट और तेज हवा में टूटे तारों के कारण कई जगह बिजली आपूर्ति ठप रही और इसका असर राजकीय मेडिकल कॉलेज पर भी पड़ गया।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में फॉल्ट के चलते 36 घंटे तक बत्ती गुल रही। इस दौरान अस्पताल की प्रमुख सेवाएं जेनरेटर के सहारे चलीं और वार्डों में अंधेरा छा गया। स्वास्थ्य कर्मियों को टॉर्च पर काम करना पड़ा और मरीज तथा तीमारदार परेशान रहे।
अस्पताल में व्यवस्थाओं की चुनौतियां
लगातार जेनरेटर चलने से ईंधन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन के सामने मुश्किलें आईं। चिकित्सा कार्य चलाते हुए स्टाफ को बैकअप व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ा। मरीजों की निगरानी और उपकरणों के संचालन के लिए नियमित बिजली की आवश्यकता बनी रही।
समस्या में देरी होने पर रविवार को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पुष्पेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी से शिकायत की। शिकायत के बाद बिजली विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए और मेडिकल कॉलेज की लाइन को तिर्वा फीडर से जोड़कर आपूर्ति सुचारू कराई गई।
सोशल मीडिया पर एक लाइनमैन का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह कहता सुनाई दे रहा है, “कर्मचारियों की कमी है तो व्यवस्थाएं कैसे दुरुस्त होंगी।” यह वीडियो विद्युत निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।
बिजली बहाल होने के बाद भी अस्पताल प्रशासन और बिजली विभाग ने आगे क्या सुधार करेंगे, इस पर चर्चा जारी है। स्थानीय लोग और मरीज व्यवस्था में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं ताकि आने वाले दिनों में ऐसी लंबी कटौती न हो।
स्रोत: अमर उजाला

