लखनऊ। 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर लंबे समय से चल रही विवाद अब फिर आग पर तेज ताजा हुआ है। 2 अक्टूबर को अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री एवं अपना दल (एस) प्रमुख अनुप्रिया पटेल से मिलकर अपनी समस्या बताई और ज्ञापन सौंपा।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वह पिछले करीब आठ साल से नियुक्ति की प्रतीक्षा में हैं, पर अभी तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियम ठीक से लागू नहीं किए गए और आरक्षित वर्गों को मिलने वाली 5 फीसदी छूट का लाभ सही तरह नहीं मिला।
खाली पद और संशोधित सूची की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस भर्ती में अब भी 23,000 से ज्यादा पद खाली हैं। इन खाली पदों में करीब 9,000 पद OBC वर्ग से जुड़े होने का दावा किया गया है। अभ्यर्थी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशें लागू करके संशोधित चयन सूची जारी करने की मांग कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों ने बताया कि जब तक नियुक्ति पत्र और आधिकारिक शेड्यूल जारी नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वे अनुशंसाओं के मुताबिक ही अंतिम सूची और नियुक्ति की माँग करते हैं।
यह पहला अवसर नहीं जब अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने आवाज उठाई है। सितंबर में प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया था और 24 सितंबर को बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में भी प्रदर्शन हुआ था। कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री को पत्र भी भेजे थे।
मुलाकात और अगले कदम
अहिंसा दिवस 2 अक्टूबर को हुई बैठक में अभ्यर्थियों ने किसी तरह का उग्र प्रदर्शन नहीं किया और पारिवारिक व सामाजिक संदर्भ में अपनी बात रखी। प्रतिनिधि ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री से मामले को सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष उठाने का अनुरोध किया। अनुप्रिया पटेल ने मामले को मजबूती से उठाने का भरोसा दिया।
अभ्यर्थी अब आगे की कार्रवाई के तौर पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के अनुपालन और संशोधित चयन सूची की प्रतीक्षा करेंगे। जब तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहने का ऐलान है।
स्रोत: TV9 भारतवर्ष

