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मथुरा: सुल्तानगंज कैंपस की लॉ कॉलेज बिल्डिंग तैयार, पढ़ाई नहीं शुरू

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के सुल्तानगंज पुलिया कैंपस में बीए एलएलबी‑एलएलबी के लिए नई बिल्डिंग तैयार है, पर बीसीआई की मंजूरी नहीं मिली।

मथुरा: सुल्तानगंज कैंपस की लॉ कॉलेज बिल्डिंग तैयार, पढ़ाई नहीं शुरू
फोटो: अमर उजाला

मथुरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के सुल्तानगंज की पुलिया स्थित कैंपस में लॉ कॉलेज की बिल्डिंग तो तैयार हो गई, लेकिन यहां कानून की पढ़ाई अभी शुरू नहीं हो पाई है। विश्वविद्यालय ने बीए एलएलबी और एलएलबी शुरू करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से अनुमोदन मांगा था, पर अनुमति नहीं मिलने से सत्र 2026-27 में भी प्रवेश नहीं हुए।

बिल्डिंग तैयार लेकिन पढ़ाई रुकी

कैंपस में विधि शिक्षा के लिए सेंटर फॉर लीगल एजुकेशन की नई बिल्डिंग पूरी कर ली गई है। विश्वविद्यालय को उम्मीद थी कि बिल्डिंग तैयार होने के बाद बीसीआई की औपचारिक अनुमति मिलते ही इस सत्र से दोनों पाठ्यक्रमों की कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। जुलाई में भी विश्वविद्यालय ने बीसीआई की अनुमति का इंतजार करने की जानकारी सार्वजनिक की थी, लेकिन सत्र शुरू होने के बाद भी मंजूरी नहीं आई।

विश्वविद्यालय ने पिछले सत्र 2025-26 में भी बीए एलएलबी और एलएलबी के संचालन के लिए बीसीआई को आवेदन भेजा था। अनुमति नहीं मिलने के कारण अब लगातार दूसरे सत्र में प्रवेश नहीं हो सके और लॉ कॉलेज शुरू करने की योजना अटकी पड़ी है। तैयार बिल्डिंग में कक्षाएं तभी आरम्भ होंगी जब बीसीआई से पाठ्यक्रम संचालन की अनुमति मिल जाएगी।

विधि संकाय कॉर्डिनेटर प्रो. राजीव वर्मा ने कहा, “अभी बीसीआई से किसी तरह की अनुमति नहीं मिली है। इसी वजह से इस सत्र में बीए एलएलबी और एलएलबी में प्रवेश नहीं ले पाए हैं। विश्वविद्यालय की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि बीसीआई से अनुमति मिल जाए और कैंपस में दोनों पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकें। अभी तक बीसीआई की ओर से अनुमोदन नहीं हुआ है।”

स्थानीय छात्रों और अभिभावकों में निराशा है। कई छात्र और परिवार इस कैंपस में स्थानीय स्तर पर विधि पढ़ाई की उम्मीद करते थे ताकि आगे की पढ़ाई के लिए शहरों की यात्रा और खर्च बच सके। प्रवेश न होने से विद्यार्थियों को दूसरे कॉलेजों में स्थान बदलना पड़ा या प्रवेश स्थगित रखना पड़ा।

आगे की प्रक्रिया

अब विश्वविद्यालय की निगाहें बीसीआई की मंजूरी पर टिकी हैं। जब तक औपचारिक अनुमोदन नहीं मिल जाता, तैयार इमारत खाली ही रहेगी और प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रयास जारी हैं और उन्होंने बीसीआई से शीघ्र अनुमति की अपेक्षा जताई है।

स्रोत: अमर उजाला

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Vikas Kumar

Vikas Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।