मथुरा। रिफाइनरी पुलिस ने एक नकली नोट रैकेट का खुलासा किया है जिसमें आरोपियों ने एक लाख रुपये के बदले पांच से सात लाख रुपये के नकली नोट देने का फरेब किया। यह खुलासा तब हुआ जब ठगी का मामले में दर्ज शिकायतकर्ता की बताई कहानी जांच में झूठी निकली।
पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता ने चार किलो चांदी और एक लाख रुपये की ठगी होने का दावा किया था, लेकिन उसके दावों के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला। कार से मिले मनोरंजन बैंक के बच्चों के नोट और सीसीटीवी फुटेज और वाहन नंबर के आधार पर पुलिस तक गिरोह का सुराग पहुँचा।
जांच और गिरफ्तारी
एसपी क्राइम श्वेता यादव ने शुक्रवार को पुलिस लाइन में मामले का खुलासा किया। जांच में पता चला कि गंगानगर, ऋषिकेश निवासी अनिरुद्ध गुप्ता 29 सितंबर को अपने मित्र योगेश कुमार के साथ मथुरा आया था और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए आरोपियों से बातचीत हुई थी।
सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर संदिग्ध वाहन का नंबर मिला और एक अक्टूबर की रात 9:13 बजे बरेली हाईवे अंडरपास पर यूपी85 सीएस 7093 स्विफ्ट कार को रोका गया। कार सवार ब्रजमोहन उर्फ इक्का उर्फ बिरजू पुत्र राजवीर सिंह निवासी कृष्णा धाम कालोनी थाना सदर मथुरा, लवकुश पुत्र धर्मवीर निवासी गणेशपुरम कालोनी थाना सदर मथुरा मूल निवासी ग्राम पर्वतपुर थाना खंदोली, आगरा और सुनील पुत्र राजवीर निवासी कुंवरपुर थाना चंदपा जिला हाथरस को गिरफ्तार किया गया।
बरामद सामान
- 32,000 रुपये असली
- करीब 31 लाख रुपये के मनोरंजन बैंक नोट
- 500 रुपये के 61 गड्डे और 100 रुपये के 8 गड्डे
- डेल कंपनी का लैपटॉप, तीन मोबाइल, स्विफ्ट कार और अवैध चाकू
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अलवर के एक लाला व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से ग्राहकों को भेजता था और ग्राहक को असली नोट दिखाकर भरोसा दिलाया जाता था। इसके बाद बच्चों के नोट असली नोटों की तरह पैक कर ग्राहक को दे दिए जाते थे और रकम साझा कर ली जाती थी।
पुलिस अब अलीगढ़ के जट्टारी निवासी सचिन, अलवर निवासी लाला और एक अन्य की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगा रही है। वहीं वादी के बयान में विरोधाभास मिलने पर उस पर भी कार्रवाई की गई है। स्थानीय लोग सूचना मिलने पर सतर्क रहें और किसी असामान्य लेन-देन की जानकारी पुलिस को दें।
स्रोत: अमर उजाला

