मीरजपुर। पूर्व मीरजापुर जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने आज भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद एक वीडियो जारी कर कई सनसनीखेज आरोप लगाए। वीडियो में उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था, स्थानीय विकास और युवाओं के भविष्य पर तीखा प्रश्न उठाया।
दिव्या मित्तल ने बताया कि उन्होंने लहुरिया दह के पहाड़ी क्षेत्र में पानी पहुंचाकर लोगों के चेहरे पर खुशी लाई, पर इसका नतीजा उन्हें झेलना पड़ा। उन्होंने कहा कि ट्रांसफर के बाद उन्हें लगभग 9 माह वनवास काटना पड़ा और इस वजह से आखिरकार उन्होंने आईएएस पद से इस्तीफा दे दिया।
लहुरिया दह का मामला
वीडियो में दिव्या मित्तल ने खास कर लहुरिया दह गांव का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “एक दिन निरीक्षण के दौरान एक महिला ने पानी की बजाए बच्चों के लिए स्कूल मांगा। कहा कि बच्चों की पढ़ाई कक्षा 5 के बाद पहाड़ों में गुम होकर रह जाती है। नियम कानून के अनुसार स्वीकृत करने के 3 साल बाद भी आज तक स्कूल नहीं बना है।”
उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर शिलान्यास और दिखावे के काम होते हैं, पर असल सोच और योजना गायब रहती है। उनके शब्दों में, “सत्ता है, शिलान्यास है, शोर है पर सोच नहीं है। मुझे उस न सोचने का हिसाब चाहिए।”
वीडियो में दिव्या मित्तल ने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और कहा कि व्यवस्था उन आवाजों को नहीं सुनती जिनकी पहुंच दफ्तरों तक नहीं है। उन्होंने जो दिशा दिखाने का आग्रह किया, वह केवल पद बदलने का नहीं बल्कि राजनीति के तरीके बदलने का रहा।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “उद्देश्य केवल एक राजनेता बदलने का नहीं बल्कि राजनीति बदलनी होगी। इरादे की राजनीति, फ़िक्र की राजनीति और सोच की राजनीति। वह राजनीति नहीं चाहिए जो सीधी बनाकर सत्ता तक पहुंचती है। बल्कि लोगों को सुनती है।”
स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता अब दिव्या मित्तल के इन बयानों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और प्रशासन से जवाब की अपेक्षा कर रहे हैं। आगे की कार्रवाई और संबंधित विभागों के जवाब का इंतजार है।
स्रोत: दैनिक जागरण

