अयोध्या। सोमवार को सर्किट हाउस सभागार में महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने प्रेसवार्ता कर कहा कि चुनावी पराजय की खीझ में संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस पर यह आरोप लगाया।
महापौर ने कहा कि विपक्ष को निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और अन्य संस्थाओं की विश्वसनीयता पर हमला करने के बजाय अपनी राजनीतिक व संगठनात्मक कमजोरियों पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक संस्थाओं पर बिना ठोस तथ्यों के सवाल उठाना जनता के लोकतांत्रिक विश्वास को कमज़ोर करने जैसा है।
निर्वाचन आयोग और एसआईआर
महापौर ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर कहा कि निर्वाचन आयोग पहले ही अपना स्पष्टीकरण दे चुका है। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में एसआईआर समेत प्रमुख निर्णय आयोग की सहमति से लिए जाने का उल्लेख है।
त्रिपाठी ने कहा कि 24 जून 2025 के मूल आदेश से लेकर विभिन्न राज्यों व केन्द्रशासित प्रदेशों में प्रक्रिया लागू होने तक आयोग की सहमति बनी रही। उन्होंने फॉर्म-6 को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर भी आपत्ति जताई और कहा कि आयोग के अनुसार गैर-एसआईआर अवधि में पूर्व निर्धारित नियम लागू होते हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह ने इस पर अपनी बात रखते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विषयों पर आरोप-प्रत्यारोप के बजाय आधिकारिक तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने राजनीतिक बहसों में तथ्य प्रधान दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य में महापौर की टिप्पणी से विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बहस तेज होने की संभावना है। नागरिकों ने कहा कि सही जानकारी और आधिकारिक स्पष्टीकरण मिलना जरूरी है ताकि भ्रम न फैले।
अब आगे क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्ष आयोग के स्पष्टीकरण पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या दोनों पक्ष सार्वजनिक बहस को तथ्यांकीय स्तर पर सीमित रखेंगे।
स्रोत: अमर उजाला

