मुज़फ़्फरनगर। 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर समाजवादी पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समाज के युवाओं से संपर्क तेज कर दिया है। यह पहल खासकर बुढ़ाना‑सिवालखास और नकुड़ जैसे जाट प्रभाव वाले इलाकों पर केंद्रित है।
लोकसभा चुनाव 2024 में रालोद अलग हुआ था, लेकिन मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट सपा ने जीतकर अपना दबदबा दिखाया। साइकिल पर सवार हुए हरेंद्र मलिक की संसद में एंट्री के बाद संगठन में उनका कद बढ़ा है और इंडिया गठबंधन की बैठकों में उन्हें प्रतिनिधि बनाया जा रहा है।
कितनी सीटों पर फोकस
सपा ने नकुड़, रामपुर मनिहारन, शामली, थानाभवन, बुढ़ाना, चरथावल, मीरापुर, सरधना, सिवालखास, मेरठ कैंट, मोदीनगर, लोनी, छपरौली, बड़ौत, मुरादनगर, शिकारपुर, अनूपशहर, स्याना, खैर, इगलास, शादाबाद, फतेहपुर सीकरी, मांट, बलदेव, छाता, गोवर्धन, बिजनौर सदर, चांदपुर, कांठ, नौगांवा, हापुड़, गढ़ सहित कई सीटों के लिए सियासी फार्मूला बनाना शुरू कर दिया है। लखनऊ में बुलाए गए सम्मेलन में इन मुद्दों पर बातचीत हुई और समन्वय के संकेत मिले।
पूर्व सीएम ने चालीस साल की उम्र तक के युवाओं से अलग से बात की और उन्हें भविष्य की रणनीति में शामिल करने का कदम उठाया। दावेदारों ने टिकट की मांग की है, जिसका फैसला बाद में लिया जाएगा।
किसानों की राजधानी सिसौली से लखनऊ पहुंचे रोहित बालियान, अभिषेक बालियान और राहुल कहते हैं, “पूर्व सीएम का विजन स्पष्ट है। संवाद बेहद सकारात्मक रहा है।” इस बयान से स्पष्ट होता है कि युवा नेताओं में उत्साह बना हुआ है।
आगे क्या होगा
पश्चिमी यूपी में सपा की रणनीति में फिलहाल निशाना रालोद पर ज्यादा दिख रहा है। पूर्व सीएम अखिलेश यादव और केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत सिंह के बीच हालिया बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल गरमाया है। अगले चरण में दावेदारों के नाम और टिकटों पर अंतिम निर्णय पार्टी की उच्चस्तरीय बैठकों में होगा।
स्रोत: अमर उजाला

