संतकबीरनगर। होली का त्योहार खत्म होते ही दूसरे प्रदेशों व शहरों में काम करने वाले लोग वापस अपने रोज़गार पर लौट रहे हैं। इसके चलते ट्रेनों व बसों में भीड़ तेज़ी से बढ़ गई है और कई स्थानों पर कंफर्म टिकट नहीं मिल रहे हैं।
स्थानीय यात्रियों ने बताया कि ट्रेनों में सीटें पहले ही भर चुकी हैं और वर्तमान स्थिति में 15 अप्रैल तक ट्रेन की कंफर्म सीटें पूरी तरह फुल हैं। जिसकी वजह से कई लोग स्टेशन पर तत्काल टिकट पर भरोसा कर जनरल कोच में सफर कर रहे हैं, जहां उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बसों में बढ़ा दबाव और महंगा किराया
ट्रेनों की कमी के चलते लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री निजी स्लीपर बसों का सहारा ले रहे हैं। खलीलाबाद से दिल्ली के लिए स्लीपर बस पकड़ने आए यात्रियों का कहना है कि किराये में तेज़ी से वृद्धि हुई है। अनिल कुमार और बासुदेव ने बताया, “दिल्ली का किराया पूर्व में 12 सौ था, लेकिन इस समय 2500 रुपये लिए जा रहे हैं।”
यात्री कह रहे हैं कि जाना अनिवार्य है, इसलिए उन्हें मनमाना किराया देने की मजबूरी स्वीकार करनी पड़ रही है। त्योहार के चलते बसों में भीड़ बढ़ने से परिवहन व्यवस्था पर दबाव है, और निजी बस संचालक मांग बढ़ने पर किराया बढ़ा रहे हैं।
प्रशासन ने सुविधा में सुधार के लिए कुछ कदम उठाए हैं। खासकर दिल्ली और कानपुर जैसी मंज़िलों के लिए अतिरिक्त बसें चलायी जा रही हैं ताकि भीड़ को संभाला जा सके। साथ ही लंबी दूरी की बसों के चालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बसों को खलीलाबाद में ओवरब्रिज पर न ले जाएं और यात्रियों को बस स्टॉप सेंटर पर ही उतार-चढ़ाव कराएं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार के बाद परिवहन सेवा में यह दबाव हर साल देखे जाने वाला विषय है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं और अतिरिक्त बसों के बावजूद यात्रियों को समय पर और किफायती सफर की उम्मीद है, वरना अधिकतर लोग मजबूरी में महंगा किराया देने को बाध्य हैं।
स्रोत: अमर उजाला

