शाहजहांपुर। सरसों की अच्छी फसल के लिए अक्टूबर से नवंबर के पहले सप्ताह को सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय सही तरीका अपनाने पर फसल रोगों से बचती है और पैदावार में वृद्धि होती है।
किसान अगर खेत की सही तैयारी, बीजों के उपचार और पौधों के बीच उचित दूरी का ध्यान रखें तो लागत घटाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। प्रति एकड़ 1.5 से 2 किलो उपचारित उन्नत किस्म के बीज बुवाई के लिए पर्याप्त माने गए हैं।
खेत तैयारी और बीज उपचार
रनजोद सिंह ने बताया कि बुवाई से पहले खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बनाना जरूरी है। जुताई के बाद खेत में पाटा चलाकर जमीन समतल कर लें ताकि नमी बनी रहे और पानी एक जगह जमा न हो।
फसल रोगों से सुरक्षित रखने के लिए बीज उपचार विशेष रूप से आवश्यक है। बीजों का उपचार करने से रोगमुक्त जमाव होता है और पौधों की शुरुआत मजबूत रहती है।
बुवाई की दूरी और खाद
बुवाई के वक्त लाइन से लाइन की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। बीजों को मिट्टी में 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर ही बोएं। “बीजों को ज्यादा गहराई में न बोएं.”
बुवाई के साथ ही नाइट्रोजन, फास्फोरस और सल्फर की संतुलित मात्रा देना फसल के विकास के लिए लाभदायक रहता है। खासकर सल्फर से दानों में तेल का प्रतिशत बढ़ता है और पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं।
रनजोद सिंह ने कहा कि सही बीज दर और संतुलित खाद देने से पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है और बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। स्थानीय किसान इस तरीका को अपनाकर लागत कम और पैदावार बढ़ा सकते हैं।
स्रोत: News18

