शाहजहांपुर। तेज बारिश और बाढ़ से जिले के कई किसानों के खेतों में लगी फसलें गिरकर डूब गईं, जिससे उनके निकट भविष्य के घरेलू और सामाजिक योजनाएं प्रभावित हो गईं। कुछ परिवारों ने बेटे-बहनों की शादी और नए घर बनाने के लिए फसल लगाई थी, लेकिन अब वे आर्थिक तौर पर सतर्क हो गए हैं।
किसानों ने बताया
फसलों के नुकसान की बातें
बहरी कुर्रिया के किसान विपिन अग्निहोत्री ने कहा, “फरवरी में बहन की शादी होनी है। इसके लिए आठ एकड़ में धान लगाया था। तीन एकड़ फसल तेज हवा और बारिश में गिरकर डूब गई। बाकी फसल गर्रा की बाढ़ के निशाने पर आई तो कहीं का नहीं रहूंगा।”
नगलाजाजू के राधाकृष्ण ने शिकायत की, “तीन एकड़ खेत में धान और मक्का को फसल की थी। तेज हवा और बारिश से एक एकड़ धान की फसल गिर गई। माघ माह में बेटे की शादी भी होनी है। कहां से खर्च पूरा होगा, कुछ समझ में नहीं आ रहा है।”
खिरिया के पवन शुक्ला ने बताया, “इस बार 15 बीघा खेत में धान लगाया था। उम्मीद थी कि फसल अच्छी होने पर भाई की शादी हो जाएगी। बारिश में धान की फसल खेत में गिरकर डूब गई। अब गर्रा में उफान बढ़ने की दशा में डूबी फसल नष्ट होने का खतरा है।”
मिर्जापुर के राम अवतार ने कहा, “बेटी की शादी करनी है और उससे पहले घर की मरम्मत कराने की योजना बनाई थी। दो एकड़ धान इन्हीं कामों के लिए लगाया था, लेकिन बारिश और बाढ़ से फसल खराब होने से उम्मीदों पर पानी फिर गया।”
प्रशासन की कार्रवाई और आगे की राह
एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार ने बताया कि फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जा चुका है। प्रभावित किसानों को फीडिंग कराई जा रही है और शासन से नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा।
किसान फिलहाल टूटे हुए वित्तीय भरोसे और अनिश्चित मौसम की वजह से चिंता में हैं। जिन्हें शादी या घर के काम के लिए फसल पर निर्भर रहना था, उन्हें अब वैकल्पिक व्यवस्था खोजनी पड़ सकती है। प्रशासन ने दोष-मुक्त करने की प्रक्रिया और मुआवजा देने के संकेत तो दिए हैं, लेकिन किसानों को राहत कब तक मिलेगी यह अभी तय नहीं है।
स्रोत: अमर उजाला

