शाहजहांपुर। पितृ पक्ष निरंतर चल रहा है और लोग अपने पूर्वजों के श्राद्ध‑तर्पण में व्यस्त हैं, पर शहर के तीन मोक्षधामों में रखे सैकड़ों अस्थि कलश अब भी अपनों के आए बिना पड़े हैं। मोक्षधाम प्रबंधन कह रहे हैं कि ये कलश लंबे समय से लौटने वाले परिजनों का इंतजार कर रहे हैं।
खन्नौत नदी के पास बने मोक्षधाम में वर्तमान में करीब 325 अस्थि कलश रखे हुए हैं। गर्रा मोक्षधाम में 100 से अधिक और रोजा मोक्षधाम में करीब 50 अस्थि कलश रखे गए हैं। मोक्षधामों के मुताबिक अंतिम संस्कार के तीन दिन बाद परिजनों को अस्थियां ले जाने के लिए कहा जाता है, पर कई परिवार अस्थियां लेने नहीं आते।
अस्थियों का रखरखाव और पहचान
अस्थियों को मिट्टी की मटकी में रखकर उस पर मृतक का नाम अंकित किया जाता है और कई कलशों पर पहचान के लिए नंबर भी दर्ज हैं। मोक्षधामों में इन कलशों को सुरक्षित रखने के लिए अलग कमरे बनाए गए हैं। खन्नौत स्थित श्मशान कमेटी के अध्यक्ष राजकुमार खंडेलवाल ने बताया कि अस्थियों को सुरक्षित तरीके से रखा जाता है और फिलहाल लगभग 325 कलश यहीं रखे गए हैं।
खन्नौत मोक्षधाम में रोजाना करीब तीन से चार शवों का अंतिम संस्कार होता है और यहां लावारिस शवों का भी अंतिम संस्कार किया जाता है। मोक्षधाम प्रबंधकों का कहना है कि जिन अस्थि कलशों की पहचान नहीं मिलती, उन्हें सुरक्षित कमरे में रखा जाता है ताकि परिवार आगे आकर पहचान कर सकें।
पंजाबी महासभा के सचिव सुनील गुप्ता ने बताया कि 30 सितंबर तक के अस्थि कलश संबंधित लोग ले जाएं। उन्होंने बताया कि 10 अक्तूबर को लावारिस अस्थियों को फर्रुखाबाद के पांचाल घाट ले जाकर विधि‑विधान से जल प्रवाह किया जाएगा। महासभा पिछले आठ वर्षों से खन्नौत, गर्रा और गदियाना मोक्षधामों में रह जाने वाली लावारिस अस्थियों का जल प्रवाह करती आ रही है।
स्थानीय लोग और परिजनों से कहा जा रहा है कि जो भी लोग अपने परिजनों की अस्थियां लेने की जानकारी रखते हैं वे जल्द मोक्षधाम से संपर्क कर लें। मोक्षधाम प्रबंधन ने यह भी बताया कि अस्थियां सुरक्षित रखी जा रही हैं और 10 अक्तूबर के बाद जिन कलशों को कोई नहीं ले जाएगा उनके साथ आवश्यक प्रक्रिया कराई जाएगी।
स्रोत: अमर उजाला

