लखनऊ। समाजवादी राजनीतिक गलियारे में ओमप्रकाश राजभर ने सोमवार को सपा नेता अखिलेश यादव पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने एक पोस्ट में कहा कि अब परिवार के बुजुर्ग नेताओं की सक्रियता भतीजे की अनुमति के बगैर नहीं मानी जा रही।
राजभर ने सीधे तौर पर शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि “अब शिवपाल यादव को सपा दफ्तर में जाने के लिए भतीजे की हरी झंडी का इंतजार करना पड़ेगा” और बताया कि “यही हाल धर्मेंद्र यादव का भी है”।
राजनीतिक बयान और परिवार भीतर की चर्चा
ओमप्रकाश राजभर ने अपने पोस्ट में पार्टी के अंदर के संबंधों और नेतृत्व के फैसलों को ताना मारा। उन्होंने अपने टिप्पणी के माध्यम से यह जताया कि पारिवारिक निर्णयों और नजरिए का असर सपा के सार्वजनिक रूप और कामकाज पर दिखाई दे रहा है।
राजभर ने टिप्पणी जारी रखते हुए कहा, “तरस इस बात पर आता है कि चच्चू को बुढ़ापे में ये सब देखना पड़ रहा है।” यह कथन स्पष्ट रूप से उसी भाव को दर्शाता है जिस पर वे प्रश्न उठा रहे हैं कि बुजुर्ग नेताओं की प्रतिष्ठा और स्वायत्तता पर किस प्रकार प्रभाव पड़ा है।
यह बयान उस समय आया है जब सपा के भीतर और परिवारिक स्तर पर सूक्ष्म गतिशीलता पर नजर बनी हुई है। राजनैतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि ऐसे बयानों का असर स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के मूड पर भी पड़ता है।
स्थानीय स्तर पर इस टिप्पणी पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। कुछ समर्थक इसे परिवारिक राजनीति पर आवश्यक आलोचना मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे अंदरूनी मुद्दों को सार्वजनिक करने की कोशिश बता रहे हैं।
आगे क्या होगा, फिलहाल कोई औपचारिक जवाब सपा नेतृत्व की तरफ से नहीं आया है। पार्टी और संबंधित नेताओं की ओर से प्रतिक्रिया मिलने पर स्थिति स्पष्ट होगी और आगे के राजनीतिक कदम उसी के अनुरूप तय होंगे।
स्रोत: India TV

