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अयोध्या: इटावा के माधवेंद्र के पास मिली 1786 की 240 वर्ष पुरानी पांडुलिपि

पांडुलिपि 1786 की है; राम मंदिर ट्रस्ट ने अब देशभर के निजी संग्रहों से प्राचीन रामकथा सामग्री जुटाने की मुहिम फिर तेज की।

अयोध्या: इटावा के माधवेंद्र के पास मिली 1786 की 240 वर्ष पुरानी पांडुलिपि
फोटो: अमर उजाला

अयोध्या। राम मंदिर ट्रस्ट ने रामकथा से जुड़े प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण का काम फिर सक्रिय कर दिया है। चढ़ावा चोरी की घटना के बाद यह अभियान कुछ समय के लिए धीमा था, लेकिन अब पुनः जोर दिया जा रहा है।

इसी क्रम में इटावा के माधवेंद्र पोरवाल के पास 1786 की हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है। यह पांडुलिपि करीब 240 वर्ष पुरानी मानी जा रही है। पोरवाल पांडुलिपि लेकर अयोध्या भी पहुंचे थे। पांडुलिपि ट्रस्ट को सौंपने पर अभी अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।

पांडुलिपियों की संख्या और संपर्क

रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि अब तक 10 दुर्लभ पांडुलिपियां ट्रस्ट को प्राप्त हो चुकी हैं। लखनऊ और चेन्नई से भी दो अन्य लोग ट्रस्ट के संपर्क में हैं। उनके पास करीब 200 से 250 वर्ष पुरानी पांडुलिपियां हैं। इनमें रामकथा से संबंधित प्राचीन ग्रंथ भी शामिल बताए गए हैं।

ट्रस्ट निजी संग्रहों में मौजूद साहित्य की जानकारी जुटा रहा है। योजना है कि उपलब्ध सामग्री को सूचीबद्ध किया जाए और उपयुक्त संरक्षण प्रदान किया जाए। संरक्षण के साथ-साथ इन दस्तावेजों का ऐतिहासिक और साहित्यिक अध्ययन भी किया जा रहा है।

रामकथा संग्रहालय की योजना

ट्रस्ट की योजना है कि रामकथा संग्रहालय में देशभर में मौजूद दुर्लभ साहित्यिक और ऐतिहासिक सामग्री को सुरक्षित रखा जाए। यह सामग्री राम, रामायण और रामकथा से संबंधित होगी। संग्रहालय में दस्तावेजों का संरक्षण आधुनिक तकनीकों से किया जाना तय है ताकि आने वाली पीढ़ियों को यह धरोहर मिल सके।

स्थानीय पुरातत्व और साहित्यिक जानकारियों को भी जोड़ने का प्रस्ताव है। निजी संग्रहधारकों से समन्वय बढ़ाने के लिए टीमें बनायी जा रही हैं। इससे कई ऐसे ग्रंथ और पांडुलिपियां प्राप्त हो सकते हैं जो अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई हैं।

आगे की प्रक्रिया

ट्रस्ट अब पांडुलिपियों की प्रामाणिकता और स्थिति की जाँच करेगा। जिन मामलों में संग्रहधारक सौंपने को राजी होंगे, वहां संरक्षण और अध्ययन की व्यवस्था की जाएगी। जिन पांडुलिपियों पर सहमति नहीं बनी है, उनके लिए बातचीत जारी रहेगी। स्थानीय लोगों और शोधकर्ताओं को जानकारी उपलब्ध करायी जाएगी।

स्रोत: अमर उजाला

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Vikas Kumar

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कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।