कासगंज। तहसील के केंद्रीय अभिलेखागार में 28 साल पुराने सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी वसीयत चस्पा कर महत्त्वपूर्ण अभिलेखों से छेड़छाड़ करने का मामला उजागर हुआ है। इस मामले में थाना दक्षिण पुलिस ने आगरा के न्यू लॉयर्स कॉलोनी निवासी लक्ष्मी नारायण समेत संदिग्ध कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस को दी तहरीर में नोएडा के ग्राम मोरना निवासी खेमचंद ने बताया कि आरोपी लक्ष्मी नारायण ने उनके पिता मामराज व चाचा धनपाल की करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने की नियत से वर्ष 1998 की एक फर्जी वसीयत तैयार की। इस कूट रचित दस्तावेज के आधार पर आरोपी ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) गौतमबुद्ध नगर के न्यायालय में झूठे तथ्य पेश कर अपना पक्ष भी बनाए रखा।
अभिलेखागार की जांच में गड़बड़ी सामने
जांच में जब उप निबंधक सदर प्रथम फिरोजाबाद ने अभिलेखों का मिलान कराया तो गंभीर तरह की अनियमितता सामने आई। उप निबंधक की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि अभिलेखागार में सुरक्षित बही संख्या-3, खंड-38 में चस्पा वसीयत का विवरण तत्कालीन इंडेक्स, स्याह और रजिस्टर नंबर-8 से पूरी तरह भिन्न है। इससे स्पष्ट हुआ कि सरकारी अभिलेखों में फर्जी पन्ने जोड़े गए थे।
सीओ सिटी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि थाना दक्षिण पुलिस ने आपराधिक षड्यंत्र, कूटरचना और धोखाधड़ी की संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। जांच के दायरे में निबंधन विभाग के तत्कालीन संदिग्ध कर्मचारियों के भी नाम शामिल हैं।
स्थानीय लोगों में इस खुलासे को लेकर चिंता है। अभिलेखागार के भरोसे पर असर पड़ने से जमीन के असली मालिकों को अपने हक के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने फोरेंसिक और रिकॉर्ड मिलान के सहारे आगे की पड़ताल तेज कर दी है। जांच में जो भी ठोस साक्ष्य मिलेंगे, उसके आधार पर अतिरिक्त नामों पर भी कार्रवाई की जाएगी। मामले की सुनवाई और रिकॉर्ड की सत्यता से जुड़े अन्य पहलुओं पर आगे की जानकारी जांच पूरी होने पर जारी की जाएगी।
स्रोत: अमर उजाला

