बरेली। बाबा नंद सिंह नानकसर कलेरा वालिया की याद में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा सुभाष नगर में 37वां संत समागम आयोजित हुआ। यह कार्यक्रम सप्ताहभर चला और समापन पर मुख्य कीर्तन दीवान रखा गया।
समागम में नानकसर से आए जत्थे के नेतृत्व में जसप्रीत सिंह हैप्पी (वीर जी) ने संपठ अखंड पाठ की समाप्ति कराई। अखंड पाठ की समाप्ति के साथ समूह संगत ने गुरुद्वारे के हॉल में पुष्पवर्षा कर आयोजन को श्रद्धाभाव से सजाया।
मुख्य कीर्तन और भजन
मुख्य कीर्तन दीवान में श्री दरबार साहिब (अमृतसर) से आए हजूरी रागी जत्थे के भाई सुरिंदर सिंह ने मधुर आवाज में कीर्तन प्रस्तुत किया और संगत को निहाल किया। लुधियाना नानकसर से आए बाबा तजिंदर सिंह (जिंदु जी) ने कीर्तन में कहा, “बाणी गुरु गुरु है बाणी, विच बाणी अमृत सारे। गुरु बाणी कहै सेवक जन मानै, प्रतख गुरु निसतारे। मो को तो भरोसो गुरु ग्रंथ महाराज पे…”
कीर्तन दीवान अरदास के साथ संपन्न हुआ। समागम के समापन के बाद गुरुओं की परंपरा के अनुसार अटूट लंगर सभी श्रद्धालुओं और उपस्थित लोगों के बीच बांटा गया, जिससे कार्यक्रम की धार्मिक गरिमा बनी रही।
अधिकारियों और संगत की उपस्थिति
समागम में कैंट विधायक संजीव अग्रवाल भी पहुंचे और गुरु साहिब के आगे माथा टेका। मंच का संचालन ज्ञानी दशमेश सिंह ने किया। इस अवसर पर मनजीत सिंह नागपाल, सुरिंदरजीत सिंह छाबरा, गुरविंदर सिंह, सुरजीत सिंह और जसमीत सिंह कोहली सहित कई अन्य धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में शामिल संगत ने धार्मिक गीतों और कीर्तन के माध्यम से संत परंपरा का सम्मान किया। आयोजन से जुड़े आयोजकों ने बताया कि ऐसे समागम समाज में एकता और भक्ति की भावना को बढ़ाते हैं।
गुरुद्वारे के पदाधिकारियों ने आगे भी इसी तरह के धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम नियमित रूप से कराए जाने की बात कही, ताकि श्रद्धालुओं को सेवा और भक्ति का अवसर मिलता रहे।
स्रोत: अमर उजाला

