बरेली। शहर का रेल नेटवर्क बदलने वाला है। गाजियाबाद-सीतापुर कॉरिडोर पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना से बरेली के अंदरूनी हिस्सों पर ट्रेनों का दबाव कम होगा और नया रूट शहर के बाहर विकसित होगा।
केंद्र सरकार ने अप्रैल में इस 403 किलोमीटर लंबी परियोजना को 14,926 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी थी। योजना के तहत कुल 859 किलोमीटर ट्रैक बिछाने का लक्ष्य रखा गया है और परियोजना को 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य है। रेलवे के अधिकारियों ने सर्वे और नक्शे का काम पूरा होने की जानकारी दी है और रिपोर्ट मंडल मुख्यालय भेज दी गई है।
रूट और नया जंक्शन
फाइनल लोकेशन सर्वे के बाद नई पटरियों का रूट लगभग तय हो गया है। योजनाबद्ध लाइनें रिंग रोड के समानांतर गुजरेंगी और मौजूदा बरेली जंक्शन, कैंट व सीबीगंज स्टेशन को बाइपास करेंगी। रामगंगा के आसपास न्यू बरेली जंक्शन बनाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
प्रस्तावित न्यू बरेली जंक्शन से बरेली-चंदौसी-अलीगढ़ और बरेली-कासगंज-मथुरा मार्गों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। नया रूट रिंग रोड और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क मजबूत करेगा। भमोरा में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार को भी इससे लाभ मिलने की संभावना बताई जा रही है।
प्रभाव और आगे की प्रक्रिया
यह रूट परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से टिसुआ तक बिछाया जाएगा और झुमका तिराहा से रजऊ परसपुर तक रिंग रोड के समानांतर रहेगा। भिटौरा स्टेशन पर कंटेनर डिपो का काम शुरू हो चुका है और फुट ओवरब्रिज व अन्य यात्री सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा।
अगला चरण भूमि अधिग्रहण का होगा। अधिकारियों ने बताया है कि रूट पर सरकारी जमीन की उपलब्धता अधिक है, जिससे भूमि अधिग्रहण की लागत सीमित रखने में मदद मिल सकती है। स्थानीय व्यापारिक और औद्योगिक इकाइयों को कच्चे माल व तैयार माल की आवाजाही में सुधार की उम्मीद है।
स्रोत: प्रभात खबर

