बरेली। सदर बाजार तथा उत्तराखंड सांस्कृतिक समाज के तत्वावधान में होने वाली रामलीला का मंचन इस बार खास है। चार-पांच अक्तूबर से होने वाली रामलीला में कई मुख्य भूमिकाएँ बेटियों के हाथों में होंगी।
मंच पर कौशल्या, सुमित्रा और उर्मिला जैसे ममतामयी किरदारों से लेकर कैकई और तारा जैसी जटिल भूमिकाएँ भी छात्राएँ निभाएँंगी। बेटियाँ राम, भरत और सीता के साथ अन्य प्रमुख पात्रों के लिए भी अभ्यास कर रही हैं और हर संवाद में नारी शक्ति का प्रभाव दिखेगा।
अभ्यास और संदेश
अभ्यास के दौरान छात्राएं रामचरित मानस के चौपाइयों का गुनगुनाना भी सुनाई देता है। आयोजन शुरू होने से पहले बेटियाँ दिन में पढ़ाई के बाद शाम को अभ्यास में जुट जाती हैं ताकि मंच पर पात्रों का आत्मसात कर सकें।
- रामलीला का मंचन: चार-पांच अक्तूबर
प्रज्ञा कांडपाल, जो भगवान राम का किरदार निभा रही हैं, कहती हैं, “दिन में पढ़ाई के बाद शाम को पूर्वाभ्यास में जुट जाती हूं। रामलीला में मंचन के लिए भगवान राम का चरित्र भी पढ़ रही हूं। अब परिवार में रामचरित मानस पर चर्चा भी होती है।” उनकी तैयारी परिवारों में भी संस्कार और चर्चा का कारण बन रही है।
उत्तराखंड सांस्कृतिक समाज के अध्यक्ष गणेश दत्त अमोला ने कहा, “एक बेटी जब राम का आदर्श सीखती है तो वह केवल स्वयं को सशक्त नहीं बनाती, बल्कि एक बेटी, बहन और आगे चलकर मां के रूप में अपने पूरे परिवार को मर्यादा और संस्कारों से सींचती है।” आयोजन की नींव इसी सोच पर रखी गई है।
सदर बाजार के रामलीला नाटक समाज के प्रमुख सतीश मेहता का कहना है, “आज के दौर में बेटियां हर क्षेत्र में बराबरी का हक पा रही हैं। दर्शक बालिकाओं को श्रीराम की वेशभूषा में अधर्म पर विजय पाते देखेंगे तो यह दृश्य हर माता-पिता को अपनी बेटियों पर गर्व करने का हौसला देगा।”
स्थानीय लोग कहते हैं कि इस पहल से न केवल महिला सशक्तिकरण का संदेश मिलेगा बल्कि सांस्कृतिक शिक्षा भी मजबूत होगी। दर्शक मंचन देखने आ सकते हैं और परिवार के साथ आने पर बेटियों के अभिनय को प्रोत्साहन मिलेगा।
स्रोत: अमर उजाला

